Chief Minister Yogi Adityanath.
Chief Minister Yogi Adityanath.
मुख्यमंत्री से बड़े विभाग लेकर नए मंत्रियों में बांटे जाने की चर्चाओं पर आखिरकार विराम लग गया. चर्चा थी कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को गृह विभाग के बाद सबसे भारी माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन उन्हें एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग) दिया गया. हालांकि यह विभाग भी जनता और रोजगार से सीधे जुड़ा होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
भूपेंद्र चौधरी को मिला MSME विभाग
एमएसएमई विभाग में मुख्यमंत्री रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, यूपीएसआईसी (UPSIC), यूपी स्मॉल इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी कई अहम योजनाएं आती हैं, जिन पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की सीधी नजर रहती है. यह विभाग पहले मंत्री राजीव सचान के पास था, लेकिन अब उनके पास सिर्फ खादी एवं रेशम उद्योग विभाग बचा है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजीव सचान का राजनीतिक कद कुछ कम हुआ है.
मनोज पांडे का बढ़ा कद
समाजवादी पार्टी से बीजेपी में आए मनोज पांडे को सबसे अहम विभागों में से एक खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग दिया गया है, जो सीधे जनता के हितों से जुड़ा माना जाता है. ब्राह्मण चेहरे के तौर पर मंत्रिमंडल में शामिल किए गए मनोज पांडे का कद इस विस्तार के बाद काफी बढ़ने की चर्चा है. वैसे भी बीजेपी लंबे समय से ब्राह्मण नाराजगी को कम करने की कोशिश में लगी हुई थी. यह विभाग पहले बनारस से आने वाले दयालु मिश्रा के पास था, लेकिन उनसे यह जिम्मेदारी लेकर मनोज पांडे को सौंप दी गई. अब दयालु मिश्रा के पास सिर्फ आयुष विभाग बचा है.
मुख्यमंत्री से बड़े विभाग लेने की चर्चा निकली गलत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बड़े विभाग लेकर नए मंत्रियों में बांटने की जो चर्चा थी, वह पूरी तरह गलत साबित हुई. उल्टा, कई मंत्रियों के विभाग कम कर दिए गए और राजीव सचान व दयालु मिश्रा के अहम विभाग क्रमशः भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे के बीच बांट दिए गए.
विभाग बंटवारे में लगा एक हफ्ते से ज्यादा समय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागों के बंटवारे में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लिया. 10 मई को दो कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार मंत्री और चार राज्य मंत्रियों ने शपथ ली थी, जबकि 17 मई को उनके विभागों का बंटवारा किया गया.
अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष से मुलाकात रही चर्चा में
विभागों के बंटवारे से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अमित शाह और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात काफी चर्चा में रही. क्योंकि यह बैठक मंत्रिमंडल विस्तार के बाद और विभाग बंटवारे से पहले हुई थी, ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि विभागों का फैसला दिल्ली से होगा. हालांकि जब विभागों का बंटवारा सामने आया, तो साफ नजर आया कि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ही चला.
सोमेंद्र तोमर और अन्य नेताओं को क्या मिला?
मंत्रिमंडल में गुर्जर चेहरे सोमेंद्र तोमर को राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया. हालांकि राज्य मंत्री रहते उनके पास ऊर्जा जैसा अहम विभाग था, लेकिन स्वतंत्र प्रभार मिलने के बाद उन्हें राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग सौंपा गया. वहीं, कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास, कैलाश राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग, सुरेंद्र दिलेर को राजस्व, और हंसराज विश्वकर्मा को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग दिया गया है.
जाट सियासत को लेकर भी संदेश
भूपेंद्र चौधरी जाट बिरादरी से आते हैं और बीजेपी के बड़े जाट चेहरे माने जाते हैं. हालांकि बीजेपी गठबंधन में आरएलडी भी शामिल है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जाट राजनीति को लेकर भी एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश हुई है.
हालांकि विभागों के इस बंटवारे के बाद कुछ नेताओं को झटका लगा है तो कुछ का राजनीतिक कद बढ़ा नजर आ रहा है. लेकिन एक बात साफ हो गई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह संकेत दे दिया कि वे किसी दबाव में काम नहीं कर रहे हैं और विभागों के फैसले में अंतिम निर्णय उनका ही रहा.
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