Madhav Gadgil and Western Ghats (Photo/Getty Images)
Madhav Gadgil and Western Ghats (Photo/Getty Images)
भारत के पर्यावरण आंदोलन की सोच और दिशा तय करने वाले मशहूर वैज्ञानि माधव गाडगिल का 83 साल की उम्र में पुणे में निधन हो गया. वो काफी समय से बीमार थे. उन्होंने अस्पताल में आखिरी सांस ली. माधव ने दशकों तक पर्यावरण संरक्षण के लिए काम किया. साल 2010 में उन्होंने वेस्टर्न घाट्स इकोलॉजी एक्सपर्ट चैनल की अध्यक्षता की थी.
अर्थशास्त्री के घर पैदा हुए थे माधव-
माधव गाडगिल का जन्म 24 मई 1942 को पुणे में हुआ था. उनके पिता मशहूर अर्थशास्त्री धनंजय गाडगिल थे और गोखले संस्थान के पूर्व डायरेक्टर थे. वो घाटों की जैव-विविधता में पले-बढ़े थे. उन्होंने साल 1963 में फर्ग्यूसन कॉलेज से जीव विज्ञान में स्नातक और साल 1965 में मुंबई विश्वविद्यालय से पीजी किया था. उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में गणितीय परिस्थितिकी और पशु व्यवहार पर रिसर्च किया और साल 1969 में पीएचडी की.
गाडगिल कमीशन की रिपोर्ट में क्या था?
साल 2010 में पर्यावरण और वन मंत्रालय ने माधव गाडगिल को वेस्टर्न घाट्स इकोलॉजी एक्सपर्ट पैनल (WGEEP) का चेयरमैन नियुक्त किया. इसे गाडगिल कमीशन के नाम से जाना जाता है. इस कमेटी की रिपोर्ट साल 2011 में आई. इस कमेटी ने ऐतिहासिक रिपोर्ट पेश की थी. जिसमें पश्चिमी घाटों के 64 फीसदी हिस्से को 3 हिस्सों (Ecologically Sensitive Areas) में बांटने की सिफारिश की थी. इसमें ESZ-1 में खनन, बांध या बड़ी परियोजनाओं पर बैन था. जबकि ESZ-2 में प्रतिबंधित एक्टिविटीज और ESZ-3 में रेगुलेटेड डेवलपमेंट का इजाजत थी.
रिपोर्ट में क्या की गई थी सिफारिश?
यह रिपोर्ट 150 से अधिक विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के साथ विचार-विमर्श के आधार पर तैयार किया गया था. इस रिपोर्ट में भूस्खलन, बाढ़ और जैव विविधता के नुकसान को रोकने के लिए ग्राम सभा को वीटो पावर, जैविक खेती को बढ़ावा देने, जंगल लगाना और विनाशकारी उद्योगों पर बै लगाने की अपील की गई थी. भले ही विकास की तरफ भागते राज्यों ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया हो, लेकिन रिपोर्ट ने साल 2018 में केरल में आई बाढ़ जैसी आपदाओं की चेतावनी दी थी.
साल 2013 में कस्तूरीरंगन पैनल ने सिर्फ 37 फीसदी इलाके को ESA के तौर पर लिया. लेकिन गाडगिल की सोच ने पर्यावरण के संरक्षण की लड़ाई को प्रेरित किया.
सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज की स्थापना-
गाडगिल ने साल 1982 में भारतीय विज्ञन संस्थान के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज की स्थापना की, जो देश में पर्यावरण शोध का बड़ा केंद्र बना. उन्होंने साल 1986 में नीलगिरि को भारत का पहला जैवमंडल अभ्यारण घोषित करने में महत्वपूर् भूमिका निभाई. उन्होंने बायोलॉजिकल डायर्सिटी एक्ट 2002 को आकार देने में भी योगदान दिया.
गाडगिल ने कई फेमस किताबें लिखी हैं. इसमें 'दिस फिशर्ड लैंड' और 'इकोलॉजी एंड इक्विटी' जैसी किताबें शामिल हैं. इन किताबों के जरिए उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के सही और टिकाऊ इस्तेमाल के लिए तर्क दिए हैं. उन्होंने इसमें पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक न्याय से जोड़ा है.
गाडगिल को पद्म भूषण से नवाजा गया-
माधव गाडगिल को साल 1992 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया. इसके बाद साल 2006 में उनको पद्म भूषण सम्मान मिला. साल 215 में पर्यावरण की उपलब्धियों के लिए टायलर पुरस्कार (Tyler Prize) और साल 2024 में UNEP चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड मिला.
गाडगिल ने प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार परिषद और नेशनल टाइगर अथॉरिटी में भी सेवाएं दी.
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