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कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जिसने इलाज और मेडिकल सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रावतपुर स्थित एक निजी अस्पताल इस पूरे मामले का मुख्य केंद्र बताया जा रहा है, जहां नियमों को नजरअंदाज़ कर किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है.
शिकायत से शुरू हुई जांच प्रक्रिया
मामला सोमवार को मिली एक शिकायत से सामने आया. पुलिस ने जब शुरुआती जांच की, तो किडनी की अवैध खरीद-फरोख्त और संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिलते ही कार्रवाई तेज कर दी गई. अस्पताल संचालक, एक बिचौलिये समेत चार-पांच लोगों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी. शहर और आसपास के इलाकों में लगातार दबिशें भी दी जा रही हैं.
10 लाख के लालच में युवक से करवाई गई किडनी डोनेशन
जांच में सामने आया कि कल्याणपुर के आवास विकास-3 निवासी शिवम अग्रवाल ने उत्तराखंड के एक युवक को 10 लाख रुपये का लालच देकर किडनी डोनेट करने के लिए तैयार किया.युवक को यह बताया गया कि किडनी किसी जरूरतमंद रिश्तेदार के लिए ली जा रही है. आर्थिक मजबूरी के चलते उसने हां कर दी. रावतपुर के निजी अस्पताल में उसकी किडनी निकाली गई. आरोप है कि यही किडनी मुजफ्फरनगर की 35 साल की महिला को 90 लाख रुपये से ज्यादा में बेच दी गई.
डोनर को नहीं मिली पूरी रकम
डोनर को वादा किए गए 10 लाख रुपये के बजाय 6 लाख नकद और 3.5 लाख रुपये का चेक दिया गया. जब बाकी रकम मांगी गई तो उसे टालते रहे. इसी कटौती और टालमटोल के कारण युवक ने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद पूरा रैकेट पकड़ा गया.
ऐसे हुआ युवक को शक
ऑपरेशन के बाद डोनर और रिसीवर दोनों को एक दिन उसी अस्पताल में रखा गया. इसके बाद उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया. सूत्रों के अनुसार, डोनर, जिसने अपना नाम 'आयुष' बताया था, उसको एक अन्य अस्पताल ले जाया गया, जबकि महिला मरीज को कहीं और शिफ्ट किया गया. इससे शक और गहरा हुआ कि नेटवर्क कई अस्पतालों में फैला है.
कई अस्पतालों पर छापेमारी
पुलिस ने दलाल शिवम और अस्पताल संचालक सुरजीत सिंह आहूजा को पहले ही पकड़ लिया था. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को भी जांच में शामिल किया गया. संयुक्त टीम ने प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल सहित कई जगहों पर छापे मारकर किडनी से जुड़े रिकॉर्ड, मरीजों की फाइलें और अन्य दस्तावेज कब्जे में लिए.
दो राज्यों में कनेक्शन होने के संकेत
पूछताछ में डोनर ने पहले खुद को मेरठ का निवासी बताया, बाद में उसने कहा कि वह बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है और कुछ समय से मेरठ में रह रहा था. उसी दौरान उसकी मुलाकात शिवम से हुई और वहीं से किडनी डोनेशन का सौदा तय हुआ.
सूत्रों का दावा है कि इसी तरह एक अन्य केस में एक छात्रा से करीब 4 लाख रुपये में किडनी डोनेट करवाई गई, जिसे बाद में 45 से 50 लाख रुपये में बेचने की आशंका है.
क्राइम ब्रांच की रातभर छापेमारी, कई लोगों ले पूछताछ
क्राइम ब्रांच ने देर रात तक तीनों अस्पतालों में छापेमारी की और कई अहम सबूत जुटाए. अस्पताल संचालकों, एक डॉक्टर दंपती और दलाल शिवम को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है. जिस अस्पताल में महिला रिसीवर को शिफ्ट किया गया था, वहां से भी पांच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.
फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम तेजी से जांच आगे बढ़ा रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह केस सिर्फ अवैध किडनी ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े, संगठित सप्लाई नेटवर्क के सक्रिय होने के संकेत हैं.
(रिपोर्ट- सिमर चावला)
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