Unique Bakrid Initiative
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बकरीद से पहले आगरा में एक मुस्लिम परिवार की अनोखी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है. शाहगंज क्षेत्र के तिरंगा मंजिल शेरवानी मार्ग पर रहने वाले एडवोकेट गुल चमन शेरवानी और उनके परिवार ने बकरे की तस्वीर वाला केक काटकर लोगों को प्रेम, भाईचारे और जीव हत्या रोकने का संदेश दिया. इस पहल को देखने के लिए इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई. परिवार की इस सोच की हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने सराहना की. सोशल मीडिया पर भी इस पहल की चर्चा हो रही है और लोग इसे सामाजिक सौहार्द की मिसाल बता रहे हैं.
अल्लाह को दिखावा नहीं, नियत पसंद है
एडवोकेट गुल चमन शेरवानी ने कहा कि कुर्बानी का असली मतलब सिर्फ जानवर की कुर्बानी देना नहीं, बल्कि इंसान के अंदर मौजूद बुराइयों को खत्म करना है. उन्होंने कहा कि अल्लाह को इंसान की सच्ची नियत पसंद होती है, दिखावा नहीं.
उन्होंने कहा, 'आज कई लोग कुर्बानी के नाम पर दौलत का प्रदर्शन करते हैं, जबकि असली कुर्बानी अपने अंदर के लालच, नफरत, अहंकार और बुरी सोच को छोड़ने में है.' शेरवानी ने यह भी कहा कि अगर कोई गरीब व्यक्ति सच्चे दिल और नेक नियत से इंसानियत का रास्ता अपनाता है तो वही सबसे बड़ी कुर्बानी मानी जानी चाहिए.
इलाके में जुटी लोगों की भीड़
परिवार द्वारा बकरे की तस्वीर वाला केक काटने की खबर फैलते ही आसपास के लोग वहां पहुंचने लगे. कई लोगों ने इस पहल को इंसानियत और सामाजिक भाईचारे का संदेश बताया. लोगों का कहना था कि त्योहारों का मकसद लोगों को जोड़ना और प्रेम फैलाना होना चाहिए.
क्या है बकरीद का महत्व?
बकरीद यानी ईद-उल-अजहा इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार माना जाता है. यह त्योहार हजरत इब्राहिम की कुर्बानी और अल्लाह के प्रति उनकी आस्था की याद में मनाया जाता है. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं.
-नितिन उपाध्याय की रिपोर्ट