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Malpua Recipe: इस आसान ट्रिक से वसंत पंचमी पर बनाएं फूला-फूला मालपुआ, तेल भी ज्यादा नहीं सोखेगा

बसंत पंचमी में मालपुआ कई जगहों पर बनाया जाता है. अगर आप भी सोच रहे हैं मालपुआ बनाने का तो, इस रेसिपी को फॉलो कर के आप आसानी से मालपुआ बना सकते हैं.

घर पर बनाएं टेस्टी और फ्लफी मालपुआ घर पर बनाएं टेस्टी और फ्लफी मालपुआ
हाइलाइट्स
  • मालपुआ बनाने की आसान रेसिपी

  • मालपुआ कैसे बना सकते हैं

बसंत पंचमी का नाम आते ही घर में मीठी खुशबू, पीले रंग की रौनक और पारंपरिक पकवानों की याद ताजा हो जाती है. कई क्षेत्र में इस दिन माल पुआ बनाना बेहद शुभ माना जाता है. लेकिन कई बार चाहकर भी घर पर वैसा फ्लफी और सॉफ्ट माल पुआ नहीं बन पाता जैसा गांव या ननिहाल में बनता था. कभी पुआ कड़ा हो जाता है, तो कभी तेल ज्यादा सोख लेता है. तो कभी कढ़ाई में चिपकने लगता है. अगर आपके साथ भी यही दिक्कत होती है, तो इस आसान ट्रिक की मदद से आप घर बैठे एकदम देसी स्टाइल वाला मालपुआ बना सकते हैं.

माल पुआ बनाने का सामान 

  • मैदे का आटा- 1 कप
  • सूजी- आधा कप
  • फुल क्रीम दूध- 1 कप
  • कद्दूकस गुड़ या चीनी- 1 कप 
  • सौंफ- आधा छोटा चम्मच
  • सौंठ पाउडर- एक चुटकी
  • इलायची पाउडर- आधा छोटा चम्मच
  • केला- 1 मैश किया हुआ 
  • घी या रिफाइंड- तलने के लिए

फ्लफी माल पुआ का सीक्रेट ट्रिक
अक्सर लोग बैटर को फूलने का मौका नहीं देते और तुरंत तल देते हैं. ऐसा करने से पुआ कड़ा हो जाता है. असली ट्रिक यह है कि बैटर को कम से कम 50 से 60 मिनट पहले ढककर छोड़ दें. इससे सूजी फूल जाती है और माल पुआ अंदर से सॉफ्ट बनता है. साथ ही गुड़ या चीनी को दूध में हल्का गर्म कर के घोल लें, इससे मिठास अच्छी आती है.

गांव स्टाइल माल पुआ बनाने का तरीका 

  • सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा और सूजी मिलाएं. अब इसमें दूध में घुला हुआ गुड़ डालें. सौंफ, सौंठ, मैश केला और इलायची पाउडर मिलाकर अच्छी तरह फेंटें. ध्यान रखें कि बैटर न ज्यादा गाढ़ा हो और न ज्यादा पतला. फिर बैटर को ढककर रख दें.
  • अब कढ़ाई में घी या रिफाइन गरम करें. जब रिफाइन या घी गरम हो जाए तब इसमें करछी से थोड़ा बैटर डालें और मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें. गैस का फ्लेम मध्यम रखें क्योंकि धीमी आंच पर तलने से माल पुआ अंदर तक अच्छे से पकता है.

परोसने का पारंपरिक तरीका
कई जगहों पर माल पुआ को ठंडाई या फिर सब्जी के साथ परोसा जाता है. वहीं बसंत पंचमी के दिन इसे पीले फूलों के साथ मां सरस्वती को चढ़ाया जाता है और फिर पूजा के बाद प्रसाद के रूप में भी रखा जाता है. 
 

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