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होली पर 150 साल पुरानी परंपरा, गांव में निकलती है दामाद की गधा सवारी

होली के मौके पर महाराष्ट्र के बीड के विडा गांव में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान एक दामाद को गधे की बिठाकर पूरे गांव में घुमाया जाता है. ये परंपरा 150 साल पुरानी है. इस साल 75 साल के दामाद शिवाजी गालफाडे को गधे पर घुमाया गया.

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महाराष्ट्र के बीड जिले की केज तहसील के विडा गांव में धूलिवंदन (होली) के अवसर पर निभाई जाने वाली एक अजीबोगरीब और ऐतिहासिक परंपरा इस साल फिर से धूमधाम से मनाई गई. यहाँ गांव के दामाद को गधे पर बिठाकर उसकी शोभायात्रा निकालने की परंपरा है. इस साल शिवाजी गालफाडे को 'सम्मानित' दामाद के रूप में चुना गया.

150 साल पुरानी है परंपरा-
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा लगभग 90 से 150 साल पुरानी है. इसकी शुरुआत निजामशाही के समय आनंदराव देशमुख नामक व्यक्ति ने की थी. करीब 1915 में उनके साले (दामाद) होली के अवसर पर ससुराल आए थे. हंसी-मजाक के दौरान उन्होंने अपने साले को गधे पर बिठाकर पूरे गांव में घुमाया था. तब से यह मजाक एक ऐसी परंपरा बन गया, जिसे आज भी गांव वाले बड़े चाव से निभाते हैं.

विगत कुछ वर्षों में इस अटूट परंपरा को दो बार रोकना पड़ा था. साल 2021 कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी थी. पिछले साल मस्साजोग के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के कारण गांव में शोक का माहौल था, जिसके चलते यह उत्सव नहीं मनाया गया.

8-10 दिन पहले शुरू होती है दामाद की तलाश-
होली से 8-10 दिन पहले ही गांव के युवाओं की टोलियां 'दामाद' की तलाश में निकल पड़ती हैं. स्थिति यह होती है कि कई दामाद इस 'गधा सवारी' के डर से गांव छोड़कर भाग जाते हैं या भूमिगत हो जाते हैं. जो दामाद हाथ लग जाता है, उसे बड़े मान-सम्मान और थोड़ी मस्ती के साथ गधे पर बिठाया जाता है और डीजे की धुन पर पूरे गांव में उसका जुलूस निकाला जाता है.

आमतौर पर गधे की सवारी के बाद दामाद को नए कपड़े और सोने की अंगूठी भेंट की जाती है. हालांकि, इस साल सोने की बढ़ती कीमतों के कारण गांव वालों ने केवल कपड़ों का उपहार देने का निर्णय लिया. इस वर्ष की मिरवणूक की शुरुआत स्वर्गीय अजीत पवार की प्रतिमा को पुष्पहार अर्पित कर की गई.

(रोहितदास हातागले की रिपोर्ट)

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