Madhavi Chaudhary Inspiring Story
Madhavi Chaudhary Inspiring Story
मेहनत, लगन और आत्मनिर्भर बनने के जज्बे से महिलाएं किस तरह अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, इसकी मिसाल हाथरस जिले की सासनी तहसील क्षेत्र के रुदायन गांव निवासी माधवी चौधरी ने पेश की है. पार्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़कर माधवी चौधरी ने न केवल अपना रोजगार शुरू किया, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई. जैविक मिर्च के अचार के कारोबार और सिलाई-ब्यूटीशियन के हुनर के दम पर उन्होंने सफलता की नई कहानी लिखी है.
ऐसे हुई थी इस सफर की शुरुआत
माधवी चौधरी के इस सफर की शुरुआत वर्ष 2016 में पार्वती स्वयं सहायता समूह के गठन के साथ हुई. एक एनजीओ के माध्यम से गठित इस समूह में महिलाओं ने हर महीने 100 रुपए की बचत शुरू की. बाद में समूह को 15 हजार रुपए का रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) मिला. समूह की सहमति से इस राशि का उपयोग कर माधवी चौधरी ने अपने सिलाई और ब्यूटीशियन के हुनर को रोजगार का माध्यम बनाया.
करीब दो साल बाद समूह को 1.10 लाख रुपए की सहायता राशि मिली. इसके बाद समूह की महिलाओं ने मिलकर जैविक मिर्च का अचार बनाने का कारोबार शुरू किया. समूह की कई महिलाओं ने भैंस खरीदकर दूध और डेयरी व्यवसाय भी शुरू किया. इन गतिविधियों से महिलाओं की आमदनी बढ़ी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी.माधवी चौधरी ने अपनी आमदनी से बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया. उनके तीनों बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं. उनका बड़ा बेटा इंटरमीडिएट में पढ़ रहा है, जबकि दूसरा बेटा केंद्रीय विद्यालय और सबसे छोटा बेटा केएल जैन स्कूल में कक्षा नौ में अध्ययनरत है.
लखपति दीदी के रूप में किया गया सम्मानित
अचार कारोबार में सफलता और बेहतर कार्यों के लिए माधवी चौधरी को लखपति दीदी के रूप में सम्मानित किया गया और उन्हें कई प्रशस्ति पत्र भी मिले. वर्ष 2022 में उन्हें भारतीय किसान संघ में जिला महिला प्रमुख का दायित्व सौंपा गया. संगठन के विभिन्न मंचों पर भी उन्हें सम्मानित किया गया. अब माधवी चौधरी और स्वयं सहायता समूह की अन्य महिलाओं ने मिलकर करोड़पति दीदी बनने का लक्ष्य तय किया है. उनका यह सफर बताता है कि छोटी बचत, सामूहिक प्रयास और हुनर के सही इस्तेमाल से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं और अपने परिवार के साथ समाज की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं.