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Hibiscus Care in Winter: सर्दियों से पहले रुक जाती है गुलहड़ की बढ़त? जानें कारण और उसके साथ अनोखा समाधान

सर्दियों का मौसम नजदीक आते ही तापमान गिरने के कारण गुड़हल के पौधे की बढ़त धीमी हो जाती है और नई पत्तियां निकलना कम हो जाती हैं. इस दौरान पौधे को अधिक पानी और खाद देने से बचाना चाहिए. ऐसे ही कुछ उपाय अपनाने से पौधे को स्वस्थ रखा जा सकता है.

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गुड़हल के पौधों की ग्रोथ बढ़ाने का तरीका गुड़हल के पौधों की ग्रोथ बढ़ाने का तरीका

गुड़हल का पौधा गर्मियों और बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ता है, लेकिन जैसे-जैसे सर्दियां नजदीक आती हैं, इसकी नई पत्तियां निकलना कम हो जाती हैं. कई बार पौधे की बढ़त पूरी तरह रुकी हुई नजर आती है और कलियां भी कम आने लगती हैं. ऐसे में लोग खाद-पानी बढ़ा देते हैं, जबकि इसकी वजह मौसम में होने वाला बदलाव हो भी सकता है. अगर आप भी चाहते हैं कि ठंड के दिनों में आपका गुड़हल स्वस्थ बना रहे, तो पहले समझिए कि इसकी बढ़त क्यों धीमी पड़ती है और पौधे की देखभाल किस तरह करनी चाहिए.

ठंड में क्यों धीमी पड़ जाती है गुड़हल की बढ़त?
गुड़हल एक गर्म मौसम में अच्छी तरह बढ़ने वाला पौधा है. इसके विकास पर तापमान का सीधा असर पड़ता है. जब दिन छोटे होने लगते हैं और रात का तापमान गिरता है, तो पौधे की बढ़त वाली गतिविधियां धीमी हो जाती है. प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया भी रोशनी और तापमान से प्रभावित होती है. इसी वजह से नई पत्तियां निकलने और शाखाओं की लंबाई बढ़ने की रफ्तार कम हो जाती है. 

ज्यादा पानी देना भी बन सकता है परेशानी
सर्दियों में मिट्टी से पानी गर्मियों के मुकाबले धीरे सूखता है. ऐसे में अगर पौधे को पहले जितना ही पानी दिया जाए, तो गमले की मिट्टी लंबे समय तक गीली रहती है. इससे जड़ों तक हवा पहुंचने में परेशानी होती है और जड़ सड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत जांचें. अगर मिट्टी अभी नम है, तो पानी देने में जल्दबाजी न करें. गमले में पानी निकलने के लिए नीचे छेद होना भी जरूरी है.

 गुड़हल के लिए अपनाएं यह आसान उपाय
सर्दियां शुरू होने से पहले पौधे की जगह पर ध्यान देना सबसे जरूरी है. गुड़हल को ऐसी जगह रखें, जहां उसे पर्याप्त रोशनी और संभव हो तो सुबह की सीधी धूप मिले. खासकर ठंडी हवा चलने पर पौधे को सुरक्षित जगह पर रखना फायदेमंद हो सकता है.

एक आसान तरीका यह भी है कि गमले की मिट्टी के ऊपर सूखी पत्तियों की पतली परत बिछा दें. इसे मल्चिंग कहते हैं. इससे मिट्टी में नमी बनाए रखने और तापमान में अचानक बदलाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है. ध्यान रखें कि पत्तियों की परत तने से चिपकी न हो और मिट्टी में पानी जमा न रहे.

खाद डालने में न करें जल्दबाजी
पौधे की बढ़त धीमी होने पर बार-बार खाद डालना सही उपाय नहीं है. ठंड में गुड़हल की पोषक तत्वों की जरूरत और उन्हें इस्तेमाल करने की गति बदल सकती है. जरूरत से ज्यादा खाद जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. इस मौसम में खाद का इस्तेमाल पौधे की हालत, मिट्टी और स्थानीय तापमान देखकर करें.

पत्तियां गिरें तो इन बातों पर दें ध्यान
मौसम बदलने पर कुछ पुरानी पत्तियों का गिरना सामान्य हो सकता है. लेकिन पत्तियां लगातार पीली पड़ रही हों, तना नरम हो रहा हो या मिट्टी से बदबू आ रही हो, तो जड़ों में परेशानी की आशंका हो सकती है. ऐसी स्थिति में पानी की मात्रा, जल निकासी और पौधे पर कीटों की मौजूदगी की जांच करें.

बताए हुए तरीके से देखभाल करेंगे तो पौधे की सेहत में इजाफा होगा और सर्दियों में भी आपकी बगीचा गुलहड़ से भरा रहेगा. गौरतलब है कि सबके पास इतना टाइम नहीं होता कि रोज देख भाल कर सकें. बताए हुए तरीके को हफ्ते में एक बार करते रहे और पौधे की सेहत को जांचते रहें.
 

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