Milk Cake Recipe
Milk Cake Recipe
मिल्क केक, जिसे 'अलवर का मावा' भी कहा जाता है, राजस्थान की एक प्रसिद्ध मिठाई है. इस मिठाई की शुरुआत राजस्थान में हुई थी, जब किसी ने गलती से दूध को फाड़ दिया और उसे फेंकने के बजाय पकाकर मिठाई बना दी. इस प्रक्रिया से कलाकंद का जन्म हुआ, और जब इसे और अधिक पकाया गया, तो मिल्क केक तैयार हुआ. यह मिठाई न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि इसे बनाने की प्रक्रिया भी एक कला है.
मिल्क केक और कलाकंद में अंतर
मिल्क केक और कलाकंद दोनों मिठाइयां एक-दूसरे से काफी मिलती-जुलती हैं. दोनों में दूध, चीनी और घी का उपयोग होता है. लेकिन इन दोनों में एक मुख्य अंतर है. मिल्क केक में दूध को अधिक समय तक पकाया जाता है और उसमें नींबू या विनेगर डालकर दाना बनाया जाता है. इसके बाद इसे और अधिक पकाकर भूरे रंग का किया जाता है.
वहीं, कलाकंद को कम पकाया जाता है और इसका स्वाद अधिक मुलायम होता है. मिल्क केक में नटी और कैरामल फ्लेवर होता है, जबकि कलाकंद में प्लेन मिल्क का स्वाद होता है.
मिल्क केक बनाने की प्रक्रिया
मिल्क केक बनाने के लिए सबसे पहले फुल फैट दूध को धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसे लगातार चलाते रहना जरूरी है ताकि दूध जल न जाए. जब दूध एक तिहाई रह जाए, तो उसमें नींबू या विनेगर डालकर दाना बनाया जाता है. इसके बाद इसमें चीनी और घी डालकर इसे और पकाया जाता है. चीनी के कैरामलाइज होने से इसका रंग भूरे रंग का हो जाता है. अंत में इसे मोल्ड में डालकर ठंडा किया जाता है. ठंडा होने के बाद इसे काटा जाता है और परोसा जाता है.
मिल्क केक को बनाना एक कला है. इसे सही तरीके से पकाने के लिए अनुभव की जरूरत होती है. दूध को सही तरीके से चलाना, चीनी को सही समय पर डालना और इसे मोल्ड में सेट करना, ये सभी कदम इसे परफेक्ट बनाते हैं. इसके अंदर का दाना और बाहर का रंग इसे एक क्लासिक मिठाई बनाते हैं. मिल्क केक न केवल राजस्थान की मिठाई है, बल्कि यह भारतीय मिठाई की कला का एक अच्छा उदाहरण है. इसे बनाना जितना रोचक है, उतना ही इसे खाना भी.