Role of Diet in Life
Role of Diet in Life
Role of Diet in Life: जीव की मुख्य रूप से चार आवश्यकताएं आहार, निद्रा, भय और मैथुन हैं. इनमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण आहार है. आहार से निर्माण और विकास की प्रक्रिया पूरी होती है. आप भले ही खाद्य पदार्थों से आहार न लें, लेकिन कहीं न कहीं से आपको ऊर्जा लेनी ही होगी. बिना ऊर्जा के जीवन की लंबे समय तक कल्पना नहीं की जा सकती. जब हम खाना खाते हैं, तब हमारा शरीर पोषक तत्वों को खाने से निचोड़ कर शरीर को चलाने, विकास, मरम्मत और निर्माण के लिए ऊर्जा पैदा करता है. संतुलित आहार वो है, जो शरीर के कार्यों के लिए सभी महत्वपूर्ण और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करे.
किस प्रकार आहार हमारे ऊपर डालता है असर
शरीर के मानसिक स्तर का निर्माण विभिन्न कोशों से होता है. इनमें एक कोष अन्नमय कोष भी है. इस कोष की शुद्धि के बिना आप मन की शुद्धि तक नहीं जा सकते. आहार से ही हमारी कोशिकाओं का निर्माण होता है. फिर उन्हीं कोशिकाओं से हमारे शरीर में रस का क्षरण होता है. रस (हारमोन) से हमारी सोच में विकास और परिवर्तन आता है. आहार हमारे शारीरिक विकास, मानसिक स्थिति और विचारों को सीधे प्रभावित करता है. जिस तरह का आहार हम ग्रहण करते हैं, उसी तरह का व्यवहार और विचार हमारे अंदर उत्पन्न होता है.
किन चीजों को हम सात्विक आहार नहीं कह सकते
प्याज, लहसुन, सरसों का साग, मशरूम, मांस, मछली , मादक पदार्थ, डब्बाबंद खाद्य पदार्थ, बासी खाना.
किन चीजों को हम रखते हैं सात्विक आहार की श्रेणी में
सभी प्रकार की अनाजें और दाल, दूध और इससे निर्मित पदार्थ. सभी प्रकार की सब्जियां. फल और मेवे.
किस प्रकार के स्वभाव के लिए किस तरह का आहार ग्रहण करना चाहिए
अगर आप बहुत ज्यादा भावुक हों तो गुड और मीठी चीजें खाएं, रोटी खाएं, बासी खाने से बचें. यदि आप बहुत ज्यादा क्रोधी हों तो प्याज, लहसुन और मांस-मछली से परहेज करें. अगर आपको तनाव पालने की आदत हो तो दूध और दूध से बनी चीजें ग्रहण करें, मशरूम और कंद न खाएं. अगर आप शरीर से परेशान हों तो ज्यादा से ज्यादा सब्जियां खाएं, अनाज कम खाएं. अगर आप बुरे विचारों से परेशान हों तो मांस, मछली, प्याज, लहसुन न खाएं, मसूर की दाल से भी परहेज करें.