नाभि में लगाने के लिए सबसे बढ़िया तेल
नाभि में लगाने के लिए सबसे बढ़िया तेल
आयुर्वेद में शरीर की देखभाल के लिए कई तरह के पारंपरिक तरीके बताए गए हैं. इनमें नाभि में तेल लगाना भी शामिल है. आपने अपनी दादी-नानी से रात को सोने से पहले नाभि में तेल लगाने की सलाह जरूर सुनी होगी. माना जाता है कि इससे त्वचा को मुलायम रखने और रूखेपन से राहत पाने में मदद मिल सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अलग-अलग समस्याओं के लिए अलग-अलग तेल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है? तो चलिए आपको बताते हैं कि, किस समस्या के लिए नाभि में कौन सा तेल लगाने की सलाह दी जाती है.
नारियल का तेल
अगर आपके होंठ बार-बार फटते हैं या त्वचा रूखी रहती है, तो नाभि में नारियल का तेल लगाने की सलाह दी जाती है. नारियल का तेल त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि, फटे होंठों पर सीधे लिप बाम या पेट्रोलियम जेली लगाना ज्यादा असरदार तरीका हो सकता है.
नीम का तेल
चेहरे पर बार-बार पिंपल और एक्ने होने की समस्या से परेशान लोगों के लिए नीम के तेल का जिक्र किया गया है. हालांकि, नाभि में नीम का तेल लगाने से चेहरे के पिंपल ठीक होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. नीम का तेल सीधे चेहरे पर लगाने से भी जलन हो सकती है.
बादाम का तेल
त्वचा पर चमक लाने के लिए नाभि में बादाम का तेल लगाया जा सकता है. बादाम का तेल त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद करता है. लेकिन नाभि में इसे लगाने से चेहरे पर निखार आने का दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुआ है.
तिल का तेल
न्यूट्रिशनिस्ट हार्मोन से जुड़ी परेशानियों के लिए नाभि में तिल का तेल लगाने की सलाह देती हैं. हालांकि, इस तरीके से हार्मोन संतुलित होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. ऐसी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
नाभि में तेल लगाने का सही तरीका
नाभि में तेल लगाने से पहले उसकी सफाई का ध्यान रखना जरूरी है. नहाते समय पानी और उंगली की मदद से नाभि को धीरे-धीरे साफ करें. इसके बाद साफ और सूखी नाभि में तेल की 2 से 3 बूंदें डालकर हल्के हाथों से मसाज कर सकते हैं. इस दौरान ज्यादा दबाव न डालें. वहीं अगर नाभि के आसपास घाव, खुजली, जलन या लालिमा है, तो तेल लगाने से बचें. ध्यान रखें कि नाभि में तेल लगाने से त्वचा या हार्मोन से जुड़ी समस्याएं ठीक होने के दावों के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. इसलिए किसी भी परेशानी के लिए इसे इलाज का विकल्प न मानें.
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