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एक बार खाया तो भूल नहीं पाएंगे स्वाद! आखिर क्यों इतना मशहूर है Alphonso आम

Alphonso Mangoes: गर्मी का मौसम और आम की बात ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. भारत में आम सिर्फ फल नहीं बल्कि लोगों की यादों और स्वाद का हिस्सा है. इन्हीं आमों में Alphonso यानी हापुस को सबसे खास माना जाता है, जिसकी मिठास और खुशबू दुनियाभर में मशहूर है.

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अल्फोंसो आम अल्फोंसो आम
हाइलाइट्स
  • Alphonso आम की डिमांड क्यों है

  • जानिए रत्नागिरी के हापुस आम का राज

गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में रंग-बिरंगे फलों की बहार दिखने लगती है, लेकिन अगर किसी फल का सबसे ज्यादा इंतजार होता है तो वह है आम. भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि लोगों की यादों और स्वाद का हिस्सा है. आम की चटनी, अचार, आम पन्ना, लस्सी और मिठाइयों तक में इसका इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि आम को फलों का राजा कहा जाता है.

भारत में आम की 1500 से ज्यादा किस्में पाई जाती हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा अल्फांसो यानी हापुस आम की होती है. स्वाद, खुशबू और मिठास के कारण इसे दुनिया के सबसे खास आमों की किस्मों में गिना जाता है.

क्यों खास है अल्फांसो आम?
अल्फांसो आम अपनी मिठास, गाढ़े रस और बिना रेशों वाले गूदे के लिए मशहूर है. इसका स्वाद इतना अलग होता है कि एक बार खाने के बाद लोग दोबारा इसे जरूर खाना चाहते हैं. यही कारण है कि इसे आमों का राजा भी कहा जाता है. इस आम की सबसे बड़ी पहचान इसका केसरिया-पीला रंग और बेहद मुलायम गूदा है. पूरी तरह पकने के बाद इसका छिलका आसानी से उतर जाता है. खास बात यह है कि इसमें रेशे लगभग नहीं के बराबर होते हैं, इसलिए इसका स्वाद और भी स्मूद लगता है.

रत्नागिरी के अल्फांसो क्यों हैं सबसे प्रसिद्ध?
अल्फांसो आम मुख्य रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और कोंकण क्षेत्र में उगाए जाते हैं. इनमें भी रत्नागिरी के हापुस आम सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं. समुद्र के करीब की मिट्टी, गर्म मौसम और नमी इस आम को खास स्वाद देते हैं. सबसे अच्छे अल्फांसो आम समुद्र तट से करीब 20 किलोमीटर अंदर की जमीन पर उगते हैं. यही वजह है कि रत्नागिरी के आमों की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी काफी ज्यादा रहती है. रत्नागिरी अल्फांसो को GI Tag भी मिला हुआ है.

अप्रैल-मई में बाजार में आते हैं हापुस
अल्फांसो आम का सीजन आमतौर पर अप्रैल और मई के बीच रहता है. इसी दौरान बाजारों में इसकी सबसे ज्यादा बिक्री होती है. इसकी कीमत भी बाकी आमों की तुलना में काफी ज्यादा होती है. खुदरा बाजार में इसकी कीमत 1000 से 1300 रुपए प्रति दर्जन तक पहुंच जाती है. हालांकि महंगे होने के बावजूद लोग इसका स्वाद लेने के लिए इंतजार करते हैं.

Alphonso
Alphonso

कैसे पड़ा अल्फांसो नाम?
इस आम का नाम पुर्तगाली शासक अफोंसो डी अल्बुकर्क के नाम पर पड़ा. कहा जाता है कि पुर्तगालियों के समय ग्राफ्टिंग तकनीक से इस खास किस्म को तैयार किया गया था. बाद में यह किस्म भारत के कोंकण क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय हो गई.

उगाने में लगती है खास मेहनत
अल्फांसो आम की खेती आसान नहीं मानी जाती. इसके पेड़ों को गर्म तापमान और खास देखभाल की जरूरत होती है. तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने पर पेड़ खराब हो सकते हैं. एक पेड़ को फल देने में 5 से 8 साल तक लग सकते हैं. वहीं फल तैयार होने में करीब 3 से 5 महीने का समय लगता है.

Alphonso

स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद
अल्फांसो आम सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें पोटेशियम, मैग्नीशियम और पाचन में मदद करने वाले एंजाइम पाए जाते हैं. यह आम काफी मीठा होता है, लेकिन इसमें फैट की मात्रा बहुत कम होती है. इसलिए सीमित मात्रा में इसे खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है.

क्या महाराष्ट्र के बाहर भी उगते हैं अल्फांसो?
हालांकि अल्फांसो आम सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में उगाए जाते हैं, लेकिन इसकी खेती गुजरात, कर्नाटक और कुछ दक्षिण भारतीय राज्यों में भी की जाती है. फिर भी रत्नागिरी और कोंकण के अल्फांसो की पहचान सबसे अलग मानी जाती है.

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