
फ्लोरिडा (अमेरिका) में इन दिनों एक अजीबोगरीब प्रयोग हो रहा है- यहां जंगली खरगोश नहीं, बल्कि 'रोबोटिक खरगोश' (Robo Rabbits) छोड़े जा रहे हैं. जी हाँ, ये नकली लेकिन हकीकत जैसे दिखने वाले खरगोश असल में बर्मीज़ पायथन (Burmese Python) जैसे खतरनाक अजगरों को बाहर निकालने के लिए बनाए गए हैं.
दरअसल, फ्लोरिडा कई सालों से इन विशाल अजगरों से जूझ रहा है. ये सांप यहां के नहीं हैं, लेकिन अब Everglades नेशनल पार्क में हजारों की संख्या में फैल चुके हैं. स्थिति यह है कि स्थानीय वन्य जीव- रैकून, खरगोश, चिड़ियां, यहां तक कि घड़ियाल- इनके पेट की खुराक बन चुके हैं.
आखिर ये रोबोट खरगोश हैं क्या?
ये खरगोश किसी हॉलीवुड फिल्म से निकले गैजेट जैसे हैं. असल में ये एनिमेट्रॉनिक (animatronic) डिवाइस हैं जिन्हें असली खरगोश की तरह बनाया गया है. इनकी शरीर की हरकतें, गर्माहट और खुशबू असली खरगोश जैसी है.
सोलर पैनल से चलने वाले ये रोबोट अपने शरीर का तापमान भी उन्हीं Marsh Rabbits जैसा बनाए रखते हैं, जिन्हें अजगर सबसे ज़्यादा शिकार बनाते हैं. सबसे खास बात- हर रोबोट में कैमरा और सिग्नल डिवाइस लगा है. जैसे ही कोई पायथन पास आता है, तुरंत अलर्ट जाता है और स्पेशल टीम अजगर को पकड़ने निकल पड़ती है.
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा और साउथ फ्लोरिडा वॉटर मैनेजमेंट डिस्ट्रिक्ट की टीम ने इस गर्मी में करीब 120 रोबोटिक खरगोश छोड़े हैं.
फ्लोरिडा में अजगरों की एंट्री कैसे हुई?
कहानी सुनकर लगेगी मानो नेटफ्लिक्स की कोई थ्रिलर चल रही हो.
बर्मीज़ पायथन मूल रूप से दक्षिण- पूर्व एशिया के हैं. 1990s और 2000s की शुरुआत में ये फ्लोरिडा में पेट ट्रेड के जरिए आए. लोगों ने इन्हें पालतू के रूप में खरीदा, लेकिन जब ये 9 फीट लंबे हो गए, तो कई मालिकों ने इन्हें जंगल में छोड़ दिया. Everglades का गर्म और दलदली वातावरण इन सांपों के लिए स्वर्ग साबित हुआ. और फिर शुरू हुआ इनका “silent invasion”- अब हालत ये है कि कोई नहीं जानता कितने पायथन यहां रह रहे हैं. कुछ रिसर्चर्स का कहना है ये संख्या 3 लाख तक भी हो सकती है!
कितना नुकसान कर चुके हैं ये अजगर?
2012 की एक स्टडी में खुलासा हुआ कि छोटे स्तनधारी जीवों की आबादी में भारी गिरावट आई है.
इसका मतलब है कि फ्लोरिडा का पूरा इकोसिस्टम गड़बड़ा चुका है.
अजगरों से निपटने के लिए पहले क्या- क्या जुगाड़ हुए?
फ्लोरिडा सरकार और स्थानीय एजेंसियां पिछले दशक से हर संभव तरीका आजमा रही हैं-
साल 2025 की प्रतियोगिता में 30 राज्यों से आए 900 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और 294 अजगर पकड़े. सबसे ज्यादा 60 पायथन पकड़ने वाले शिकारी को करीब 8.7 लाख रुपये इनाम मिला.
अब रोबोटिक खरगोश इस “टूलकिट” में नया हथियार हैं.
अजगर पकड़ने के बाद होता क्या है?
यह सवाल भी लोगों के मन में उठता है. क्या इन सांपों को कहीं और छोड़ा जाता है? जवाब है- नहीं.
आगे क्या होगा?
फिलहाल ये प्रोजेक्ट शुरुआती दौर में है. हर रोबोट खरगोश की कीमत करीब 4,000 डॉलर (₹3.3 लाख) है. अधिकारियों का कहना है कि थोड़ा वक्त लगेगा लेकिन ये तरीका कामयाब हो सकता है.
सोचिए, जहां कभी खरगोश असल में अजगरों का शिकार बनते थे, वहीं अब उनके “नकली हमशक्ल” इन विशाल सांपों को खुद जाल में फंसा रहे हैं.
कह सकते हैं कि फ्लोरिडा की धरती पर टेक्नोलॉजी और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन की अजब- गजब साझेदारी देखने को मिल रही है- और इस जंग में खरगोशों की जीत ही अजगरों की हार होगी.