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Rudrayani Devi Temple: मां रुद्रायणी का दिव्य धाम! इस मंदिर में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने भी किए थे दर्शन, शारदीय नवरात्रि में यहां बह रही आस्था की बयार

शारदीय नवरात्रि चल रही है. आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने भी दर्शन किए थे. जी हां, हम बात कर रहे हैं अकोला के चिंचोली स्थित रुद्रायणी माता मंदिर की. पहाड़ियों की खूबसूरती और रात के अंधेरे में रोशनी से जगमगाता माता का भव्य दरबार श्रद्धालुओं को मन मोह ले रहा है. 

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Rudrayani Devi Temple Rudrayani Devi Temple

मां की भक्ति... पहाड़ियों की खूबसूरती... और रात के अंधेरे में रोशनी से जगमगाता माता का भव्य दरबार. महाराष्ट्र के विदर्भ में आस्था के एक ऐसे ही अद्भुत धाम के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं. शारदीय नवरात्रि में माता रानी के इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आ रहे हैं.  जी हां, हम बात कर रहे हैं अकोला के चिंचोली स्थित रुद्रायणी माता मंदिर की.

दिन के उजाले में प्रकृति की गोद में मां का धाम
चारों तरफ हरियाली से ढकी पहाड़ियां, उनके बीच ऊंचाई पर विराजमान मां रुद्रायणी देवी का मंदिर. अकोला शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर चिंचोली में स्थित मां रुद्रायणी का यह प्राचीन धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. पहाड़ी पर बने मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को गढ़ की 360 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.

शाम ढलते ही बदल जाती है गढ़ की खूबसूरती
जैसे-जैसे सूरज ढलता है, वैसे-वैसे रुद्रायणी गढ़ का नजारा भी बदलने लगता है. शाम की रोशनी में पहाड़ियों के बीच स्थित मंदिर की खूबसूरती देखते ही बनती है. आसमान के बदलते रंग और पहाड़ी पर विराजमान माता का मंदिर इस पूरे दृश्य को और भी खास बना देते हैं.

रात में रोशनी से जगमगाता मां का दरबार
रोशनी से जगमगाता मां रुद्रायणी देवी का मंदिर अंधेरे में भी अपनी अलग छटा बिखेर रहा है. पहाड़ी पर चमकती रोशनी और मंदिर का विहंगम दृश्य ऐसा एहसास कराता है, मानो प्रकृति की गोद में भक्ति का एक दीप जगमगा रहा हो. दिन, शाम और रात के इन तीनों नजारों में मां के धाम की खूबसूरती का अलग-अलग रूप देखने को मिलता है.

नवरात्रि में मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
नवरात्रि के दौरान मां रुद्रायणी देवी के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु चिंचोली पहुंचते हैं. इस मंदिर को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है. धार्मिक मान्यता है कि वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने भी यहां पहुंचकर मां के दर्शन किए थे.