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Ancient Ganesha Temple: बिहार का इकलौता मंदिर, जहां विराजे हैं अष्टधातु वाले गणेश जी! हथुआ राज के संरक्षण में हुआ था इस दिव्य मंदिर का निर्माण

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और सिद्धिविनायक के रूप में पूजा जाता है. भारत भर में जहां हजारों मंदिर उनकी महिमा का बखान करते हैं, वहीं बिहार के गोपालगंज जिले के मांझा गांव में स्थित प्राचीन गणेश स्थान मंदिर एक अनोखी श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है.

Ancient Ganesha Temple Ancient Ganesha Temple
हाइलाइट्स
  • गोपालगंज के हथुआ विधानसभा क्षेत्र में स्थित है प्राचीन गणेश स्थान मंदिर

  • हथुआ राज के संरक्षण में हुआ मंदिर का निर्माण

  • खुदाई में मिली थी अष्टधातु की चमत्कारी गणेश प्रतिमा

भगवान गणेश (Ganesh Utsav 2025) को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनके नाम के बिना अधूरी मानी जाती है. भारत में भगवान गणपति के हजारों मंदिर हैं, पर कुछ मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और स्वरूपों के कारण भक्तों के बीच खास स्थान रखते हैं. ऐसा ही एक मंदिर है बिहार के गोपालगंज जिले के मांझा गांव में स्थित प्राचीन गणेश मंदिर.

मांझा गांव का प्राचीन गणेश स्थान मंदिर
मांझा गांव में स्थित ये प्राचीन मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है. यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि आसपास के जिलों जैसे पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और गोरखपुर के भक्तों के लिए किसी तीर्थस्थान से कम नहीं है. गणेश चतुर्थी जैसे पावन अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ आते हैं.

खुदाई में मिली थी भगवान गणेश की अष्टधातु की प्रतिमा
स्थानीय पुरातात्विक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हथुआ विधानसभा क्षेत्र में स्थित प्राचीन गणेश स्थान मंदिर का इतिहास हथुआ राज के काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि इस स्थान पर जब जमीन की खुदाई हो रही थी, तभी वहां से भगवान गणेश की अष्टधातु से निर्मित दिव्य प्रतिमा प्राप्त हुई. प्रतिमा का स्वरूप और उसका सौंदर्य देखकर स्थानीय लोगों ने इसे चमत्कारी माना और इसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दी.

Ancient Ganesha Temple

हथुआ राज के संरक्षण में हुआ मंदिर का निर्माण
यह बात जब तत्कालीन हथुआ राजपरिवार तक पहुंची, तो उन्होंने इसे आस्था से जोड़ते हुए यहां एक भव्य मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया. इसके बाद हथुआ राज द्वारा इस प्रतिमा को विधिपूर्वक मंदिर में स्थापित करवाया गया. तब से यह स्थान 'गणेश स्थान' के नाम से जाना जाने लगा और आज यह एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बन चुका है.

श्रद्धा ऐसी कि पूरी होती हैं मनोकामनाएं
मंदिर में विराजमान गणेश जी की अष्टधातु प्रतिमा को बेहद पवित्र और चमत्कारी माना जाता है. मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से यहां पूजा करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. इस गणेश मंदिर में सैकड़ों वर्षों से गणेश चतुर्थी के दिन से पूजा अर्चना प्रारंभ हो जाती है और मेला भी लगता है. यह मेला फर्नीचर सहित अन्य सामानों की खरीद बिक्री के लिए जाना जाता है. 

Ganesha Temple

बिहार के कई जिलों से आते हैं श्रद्धालु
मंदिर के पुजारी राम प्रीत तिवारी ने बताया कि न केवल जिले से, बल्कि पूरे बिहार भर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और उपवास रखकर भगवान गणेश की पूजा करते हैं. ऐसा विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना को भगवान गणेश स्वीकार करते हैं. इस मंदिर में परिसर में गणेश जी की अष्टधातु की प्रतिमा के साथ एक शिवलिंग भी स्थित है. यहां भक्त गणेश जी और शिवलिंग की पूजा करते हैं.