
Sanwaliya Seth Temple
Sanwaliya Seth Temple
मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो आस्था को एक नया आयाम देती है. जहां इंसानों की भीड़ तो हर दिन ठाकुरजी के दर्शन के लिए उमड़ती है. लेकिन अब यहां एक कबूतर भी चर्चा का केंद्र बन गया है. कहा जा रहा है कि ये कबूतर रोजाना मंदिर के कपाट खुलने का इंतजार करता है और सबसे पहले भगवान के दर्शन करता है.
सांवलिया सेठ के प्रति अटूट आस्था
मेवाड़ के श्रीकृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में विराजे भगवान सांवलिया सेठ के प्रति भक्तों की श्रद्धा अटूट बनी हुई है. हर महीने मंदिर में करोड़ों रुपये का चढ़ावा और दूर-दूर से पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालु इस बात के साक्षी हैं कि यहां आस्था निरंतर और गहरी होती जा रही है. सुबह की पहली आरती से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रहती है.
सावरिया सेठ का भक्त है कबूतर
लेकिन इन दिनों इस भीड़ के बीच एक अलग ही भक्त की चर्चा है. ना वो इंसान है ना कोई खास पहचान. वो है एक साधारण सा कबूतर. जिसकी हरकतें लोगों को हैरान कर रही हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि ये कबूतर पिछले लंबे समय से मंदिर के कपाट खुलने का इंतजार करता है. ठीक वैसे ही जैसे बाकी श्रद्धालु.

मंदिर खुलते ही सबसे पहले करता है दर्शन
श्री सांवलिया सेठ मंदिर में जब कपाट बंद होते हैं, बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी होती हैं, इसी भीड़ के बीच एक कबूतर शांत बैठा नजर आता है. न कोई घबराहट, न उड़ने की कोशिश, जैसे वह भी मंदिर खुलने का इंतजार कर रहा हो. कपाट खुलते ही भक्तों से पहले कबूतर उड़कर सीधे मंदिर के भीतर पहुंच जाता है. अंदर जाकर कबूतर भगवान सांवलिया सेठ के चरणों के पास रखे चरणामृत को चोंच से ग्रहण करता है फिर थोड़ी देर वहीं बैठा रहता है.
मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव बताते हैं, भगवान सांवलिया सेठ अपने हर भक्त पर कृपा करते हैं. यहां कोई भेदभाव नहीं है. इंसान हो या कोई जीव-जंतु, सभी में परमात्मा का वास है. मंदिर मंडल की ओर से जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन, ठहरने और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है. वहीं पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी की व्यवस्था है. मंदिर की गौशाला में सैकड़ों गायों की सेवा की जाती है और परिसर में कबूतरों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं.
इस घटना को देखने वाले श्रद्धालु भी इसे आस्था और चमत्कार का प्रतीक मान रहे हैं. कई लोग इसे ठाकुरजी की कृपा बता रहे हैं. तो कुछ इसे प्रकृति और विश्वास का अद्भुत संगम मानते हैं.
रिपोर्ट- चेतन गुर्जर
ये भी पढ़ें