Shlok Hazare and other
Shlok Hazare and other
मुंबई के युवा निशानेबाज श्लोक हजारे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है. चेक रिपब्लिक में आयोजित शूटिंग चैंपियनशिप में श्लोक ने ओलंपिक खिलाड़ियों और अनुभवी निशानेबाजों के बीच 621.3 का स्कोर हासिल किया. महज 16 वर्ष की उम्र में उनका यह प्रदर्शन भारतीय निशानेबाजी के लिए उम्मीद की नई किरण माना जा रहा है.
सिर्फ इतने साल में कर दी थी निशानेबाजी के सफर की शुरुआत
श्लोक के निशानेबाजी के सफर की शुरुआत महज छह साल की उम्र में हुई. उनके पिता सतीश हजारे पुलिस अधिकारी हैं. बचपन में एक स्थानीय कार्यक्रम में एयर राइफल से निशाना साधते हुए श्लोक ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था. पहली बार उन्होंने 10 गुब्बारों में से केवल दो को निशाना बनाया था. इसके बाद लगातार अभ्यास और प्रशिक्षण के साथ उनके खेल में निखार आता गया. श्लोक के पिता ने शुरुआत में उनके लिए विशेष उपकरण तैयार करवाए, क्योंकि इतनी कम उम्र के बच्चे के लिए बाजार में उपयुक्त शूटिंग गियर उपलब्ध नहीं था.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया पदार्पण
10 साल की उम्र के बाद श्लोक ने नियमित और गंभीर प्रशिक्षण शुरू किया. मुंबई पुलिस जिमखाना में कोच स्नेहल पालपांकर कदम और अन्य प्रशिक्षकों की निगरानी में उन्होंने अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. श्लोक ने 10 मीटर एयर राइफल में अपनी पहचान बनाई और कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने लगे. उनके शुरुआती प्रशिक्षण में खेल के साथ-साथ अनुशासन और शारीरिक फिटनेस पर भी खास ध्यान दिया गया. 2 मई को श्लोक ने 54वें ग्रां प्री ऑफ प्लजेन राइफल एंड पिस्टल शूटिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया. वह ओपन मेंस कैटेगरी में हिस्सा लेने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल रहे.
तो देश का नाम करेंगे और रोशन
ओलंपिक स्तर के अनुभवी निशानेबाजों के बीच श्लोक ने 621.3 अंक हासिल किए. हालांकि वह पोडियम तक नहीं पहुंच सके, लेकिन उनका स्कोर उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा. पुराने राइफल होने की वजह से चेक गणराज्य में श्लोक द्वारा कम अंक दर्ज किए गए. अब सीजे फाउंडेशन की तरफ से फाउंडेशन अध्यक्ष सोनू जालान ने श्लोक को उसके आगे की तैयारी के लिए नई राइफल, नया शूटिंग किट और इसके आगे जितने भी प्रतियोगिताएं होंगी उनमें उसका पूरा स्पॉन्सरशिप का जिम्मा उठाया है. सीजे फाउंडेशन के अध्यक सोनू जालान ने कहा कि बिना किसी विशेष प्रशिक्षण और ज्यादा सहूलियत मिलने के बावजूद श्लोक ने चेक गणराज्य में भारत का नाम रोशन किया. अगर उसको सही दिशा और सारी सहूलियती मिले तो श्लोक शूटिंग में भारत का नाम रोशन करेगा.
देश की करना चाहते हैं सेवा
श्लोक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है और वह भविष्य में अपने प्रदर्शन को और बेहतर करना चाहते हैं. शूटिंग के साथ-साथ श्लोक का सपना IPS अधिकार बनने का भी है. उनके पिता और दादा दोनों पुलिस सेवा से जुड़े रहे हैं और श्लोक उन्हें अपना आदर्श मानते हैं. श्लोक का कहना है कि राइफल चलाने का प्रशिक्षण उनके लिए सिर्फ खेल नहीं है, बल्कि भविष्य में देश की सेवा करने की तैयारी का भी हिस्सा है. वह आगे चलकर अपने पिता और दादा की तरह पुलिस सेवा में जाना चाहते हैं.