प्रतिभा किसी बड़े शहर या उम्र की मोहताज नहीं होती. अगर हौसले बुलंद हों और लक्ष्य हासिल करने का जुनून हो, तो छोटी उम्र में भी बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है. इस बात को पश्चिम चंपारण के बेतिया निवासी 17 वर्षीय फुटबॉल खिलाड़ी हारिस अख्तर ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से साबित कर दिखाया है. राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिता में खेलने का अवसर हासिल कर हारिस ने न सिर्फ अपने करियर में एक नया मुकाम बनाया है, बल्कि बेतिया का नाम भी रोशन किया है.
शिलांग में आई-लीग 3 प्रतियोगिता में लिया हिस्सा
हारिस अख्तर ने शिलांग में आयोजित प्रतिष्ठित आई-लीग 3 प्रतियोगिता में कुप्पुराज एफसी की ओर से हिस्सा लिया. महज 17 वर्ष की उम्र में इस स्तर की प्रतियोगिता में खेलने का अवसर मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है. फुटबॉल के प्रति उनका जुनून, लगातार अभ्यास, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया है. राष्ट्रीय स्तर के मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का यह अवसर उनके आगे के खेल सफर के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बेतिया पहुंचने पर फूल-मालाओं से हुआ स्वागत
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद जब हारिस अपने गृह नगर बेतिया पहुंचे, तो उनके स्वागत के लिए लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला. स्थानीय लोगों, खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. इस दौरान लोगों ने उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. अपने बीच के एक युवा खिलाड़ी की इस उपलब्धि पर लोगों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ नजर आया.
हारिस की इस कामयाबी से उनके परिवार और करीबियों में भी खुशी का माहौल है. उनकी उपलब्धि को बेतिया के खेल जगत के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि पश्चिम चंपारण में फुटबॉल सहित अन्य खेलों में भी काफी प्रतिभाएं मौजूद हैं. इन खिलाड़ियों को अगर बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे भी बड़े मंचों पर अपनी पहचान बना सकते हैं.
युवाओं के लिए पेश की नई मिसाल
हारिस अख्तर की यह सफलता जिले के उन युवाओं के लिए खास संदेश है, जो खेल को अपना करियर बनाना चाहते हैं. उनकी उपलब्धि बताती है कि सफलता की शुरुआत किसी बड़े शहर या बड़े मैदान से ही हो, यह जरूरी नहीं है. छोटे शहर से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है. इसके लिए मेहनत, निरंतर अभ्यास और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट विश्वास जरूरी है. महज 17 साल की उम्र में आई-लीग 3 जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता तक पहुंचकर हारिस अख्तर ने बेतिया के युवाओं के सामने एक नई मिसाल पेश की है. आज उनका स्वागत सिर्फ एक खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि उस उम्मीद और प्रतिभा के सम्मान के तौर पर भी हो रहा है, जो आने वाले समय में बेतिया को खेल के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है.
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