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आज के समय में कोई दफ्तर में बैठा हो या चाय की टपरी पर, उसके हाथ में फोन रहता है और अंगूठा बार-बार ऊपर की तरफ स्वाइप करता है. ध्यान भी पूरी तरह से फोन में लगा रहता है. बीच-बीच में ठहाके भी मारता है. लेकिन आखिर माजरा क्या है ये. तो है रील का क्रेज. जिसे इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने बखूबी पकड़ रखा है. ये कोई छोटा-मोटा क्रेज नहीं, बल्कि रील बनाने का क्रेज तो ऐसा है कि लोग जान तक दांव पर लगा देते हैं. खैर इससे लोगों के फॉलोवर्स भी बढ़ते हैं. लेकिन सवाल उठता है कि इसका कोई फायदा होता है क्या? तो जवाब है जी हां, आपको रकम मिलती है इस सब की. चो चलिए बताते हैं कि कैसे ये क्रिएटर्स पैसा कमाते हैं इससे.
यूट्यूब और इंस्टाग्राम का गणित
यूट्यूब पर आमतौर से वीडियो के दो फॉर्मेट होते हैं. पहला होता है लॉन्ग वीडियो और दूसरा शॉर्ट वीडियो जिसे लोग रील भी कह देते हैं. वहीं इंस्टाग्राम की बात करें तो वहां सिर्फ रील ही होती है. लॉन्ग वीडियो कई बार घंटों की होती हैं. तो वहीं ये रील चंद मिनट की रहती है, साथ ही ये वर्टिकल फॉमेट में होती है.
कैसे होती है कमाई
यूट्यूब के लॉन्ग वीडियो में एड्स होते हैं. जिससे उस वीडियो के क्रिएटर को पैसा मिलता है. ये एड शुरुआत में हो सकता है. बीच में भी कई बार हो सकता है. साथ ही आप इसे कभी स्किप भी कर सकते हैं और कई बार नहीं. तो जितनी बार यह देखा जाता है. उतनी ज्यादा क्रिएटर की कमाई होती है. क्रिएटर इस वीडियो से किसी प्रकार से नहीं जुड़ा यह एड यूट्यूब की तरफ से डाला जाता है. अगर इन एड्स से आपको पैसे कमाने हैं, तो आपको एडसेंस से जुड़ना पड़ता है. उसके बाद खुड एड वीडियो पर लगते रहते हैं.
ब्रांड डील
यहां है असली मामला, जब एक क्रिएटर खुद को इस तरह पेश करता है कि वह इनकम मैगनेट बनता है. दरअसल जैसे-जैसे किसी क्रिएटर के फॉलोवर्स बढ़ते जाते हैं. तो मार्केट में मौजूद ब्रांड उस क्रिएटर से जुड़ते हैं और खुद को उसके वीडियो में पेश करवाते हैं. एक बेहद ही पॉपुलर तरीका है प्रोडक्ट रिव्यू, इसमें आप ब्रांड से जुड़कर उसके प्रोडक्ट के बारे में बताते हैं, कि कैसे ये उसे इस्तेमाल करके पर लगा. आपके इस रिव्यू को देख आपके फॉलोवर्स प्रोडक्ट को खरीद सकते हैं.
कई बार ब्रांड अपने प्रोडक्ट को लेकर आपसे लॉन्ग वीडियो न करवा कर रील ही तैयार करवा लेते हैं. यह भी काफी कारगर तरीका होता है लोगों के बीच प्रोडक्ट पहुंचाने का. साथ ही कई बार आपने देखा होगा कि क्रिएटर अपने वीडियो में किसी ब्रांड का जिक्र बार-बार करता है, तो यह भी एक प्रकार की ब्रांड डील ही होती है. जिससे मार्केट में लोग ब्रांड को जानें.
एफिलिएट मार्केटिंग
सरल शब्दों में कहे तो यह होता है, लोगों को दुकान पर भेजना और वहां से कमीशन लेना. इस तरीके में दरअसल क्रिएटर अपनी वीडियो में किसी प्रोडक्ट का लिंक डाल देता है. जिसके बाद अगर लोग उसपर क्लिक कर उसे खरीदते हैं, तो क्रिएटर को कमीशन मिलता है. उदाहरण के लिए किसी रेसिपी को बनाते हुए शेफ खास चाकू का इस्तेमाल करता है. साथ ही उस चाकू को कहां से खरीदा जा सकता है वो लिंक भी देता है. तो ऐसे आप शेफ पर भरोसा कर लिंक से चाकू खरीद लेते हैं. यह एक प्रकार से साइकोलॉजिकल ट्रिक होती है. जो आपको इस मार्किटिंग के तरीके में फसा देती है.