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UPI Rule: पेमेंट अटकने का टेंशन हुआ दूर, केवल 10 सेकंड में पूरा होगा ट्रांजैक्शन.. यूपीआई का नया नियम लागू

डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ता देख सरकार ने फैसला लिया है कि यूपीआई के नियमों में बदलाव किए जाएं, जिससे लोगों की पेमेंट बीच में न अटके.

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भारत में कोई भी पेमेंट करना हो तो लोग अब कैश की जगह यूपीआई या डिजिटल पेमेंट को ज्यादा प्रेफर करते हैं. बाज़ार में सब्जी विक्रेता तक अपना क्यूआर कोड लेकर बैठे होते हैं. इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यूपीआई की पहुंच और सफलता किस हद तक पहुंच चुकी है. 

यूपीआई की एक दिक्कत भी है. कई बार पेमेंट अटक जाती है. लगातार प्रोसेसिंग दिखाती रहती है. पेंडिंग में रहती है. इससे दिक्कत यह होती है कि जिससे भी लेनदेन करना होता है उसमें समय ज्यादा लगता है. यह दिक्कत किसी एक यूपीआई ऐप के साथ नहीं बल्कि पेटीएम, फोनपे, गूगल पे जैसे ऐप में होती है.

इसी दिक्कत को दूर करने के लिए सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI ने फरवरी 2026 से यूपीआई के नए नियम लागू करने का फैसला किया है. इन नियमों का मुख्य रूप से लेनदेन की प्रक्रिया को तेज बनाने, साथ ही किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को दूर करने के लक्ष्य से तैयार किया गया है.

कितनी देर में होगा लेनदेन?
कई बार सेल या खास मौके के दौरान जब लोग खरीददारी कर रहे होते हैं, तो अक्सर होता है कि उनकी पेमेंट बीच में फंस जाती है. खासतौर पर अगर फ्लैश सेल की बात करें तो यह वो मौका है जब हर कोई चाहता है कि वह फटाफट पेमेंट कर दें और समान खरीद लें, इससे पहले कि कोई ओर उसे खरीद लें. अगर इस दौरान पेमेंट अटक जाती है तो मौका हाथ से चला जाता है.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है कि यूपीआई और एपीआई रिपॉन्स के बीच के समय को कम किया जाएगा. यह पहले 30 सेकंड का होता था. लेकिन इसे अब 10 सेकंड का कर दिया गया है. यानी यूपीआई और एपीआई दोनों के पास बातचीत करने के लिए केवल 10 सेकंड होंगे. अब यह बातचीत क्या होगी और क्या होता है एपीआई और यूपीआई चलिए दोनों के बारे में बताते हैं.

भाई पैसे हैं क्या?
जब भी आप कोई लेनदेन यूपीआई के जरिए करते हैं, तो ऐप आपके बैंक से पूछता है कि क्या देने लायक पैसे हैं? यदि इसका जवाब न हैं तो आगे कोई बात होनी ही नहीं, लेकिन अगर बैंक में सफिशिएंट अमाउंट है और पे किया जा जकता है, तो दूसरे बैंक से कहा जाता है कि ट्रांजैक्शन एक्सेप्ट करो. अब यह जो पूरी बात हुई यह होती है एपीआई के अंतर्गत, एपीआई यानी कि एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस. अगर यह इंटरफेस बातचीत के टाइम को कम करता है, तो पेमेंट भी फौरन होती है. इसलिए सरकार ने टाइमिंग 30 सेकंड से घटाकर 10 सेकंड कर दी है.