Representative Image
Representative Image
आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह अलार्म से लेकर रात को आखिरी मैसेज तक, हर काम मोबाइल से ही जुड़ा है. लेकिन जिस तरह इंसानी शरीर को समय-समय पर आराम की जरूरत होती है, उसी तरह फोन को भी थोड़ा 'रेस्ट' चाहिए. हफ्ते में कम से कम एक बार मोबाइल को रिस्टार्ट करना उसकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, हालांकि इस आसान टिप के बारे में बहुत से लोग अब भी अनजान हैं.
रिस्टार्ट से बढ़ती है फोन की रफ्तार
लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने पर कई ऐप्स बैकग्राउंड में चलते रहते हैं, चाहे आप उन्हें बंद ही क्यों न कर दें. इससे रैम पर दबाव बढ़ता है और मोबाइल धीरे-धीरे स्लो होने लगता है. फोन को रिस्टार्ट करने पर रैम पूरी तरह साफ हो जाती है और सभी गैर-जरूरी बैकग्राउंड प्रोसेस बंद हो जाते हैं. इसका सीधा असर फोन की स्पीड और ओवरऑल परफॉर्मेंस पर पड़ता है, जिससे डिवाइस फिर से स्मूद तरीके से काम करने लगता है.
कनेक्टिविटी प्रॉब्लम का आसान समाधान
कई बार ऐसा होता है कि वाई-फाई कनेक्ट होने के बावजूद इंटरनेट नहीं चलता या ब्लूटूथ और मोबाइल डेटा सही से काम नहीं करते. अक्सर लोग इसे नेटवर्क की खराबी समझ लेते हैं, जबकि असल वजह फोन के सिस्टम में आई छोटी गड़बड़ी होती है. एक साधारण सा रिस्टार्ट इन कनेक्टिविटी समस्याओं को दूर कर सकता है और नेटवर्क से जुड़ी दिक्कतें अपने आप ठीक हो जाती हैं.
हैंग और लैग से मिलती है राहत
अगर आपका स्मार्टफोन बार-बार हैंग हो रहा है या ऐप्स खुलने में ज्यादा समय ले रहे हैं, तो रिस्टार्ट करना एक समाधान हो सकता है. इससे फोन को एक नया स्टार्ट मिलता है और सिस्टम पर पड़ा लोड कम हो जाता है. हालांकि, अगर हैंग की समस्या लगातार बनी रहती है, तो स्टोरेज, ऐप्स या सॉफ्टवेयर से जुड़ी गहराई से जांच करना जरूरी हो जाता है.
मेमोरी रिफ्रेश और ऐप एरर का फिक्स
फोन को रिस्टार्ट करने से न सिर्फ मेमोरी रिफ्रेश होती है, बल्कि कई छोटे-मोटे ऐप एरर भी अपने आप ठीक हो जाते हैं. यही कारण है कि टेक एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बेहतर परफॉर्मेंस और लंबे समय तक फोन को स्मूद बनाए रखने के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार मोबाइल को जरूर रिस्टार्ट करना चाहिए.