scorecardresearch

लखनऊ में दिखेगा संस्कृति और आध्यात्म का हाईटेक संगम, रिचुअल सेंटर में जीवंत होंगी भारतीय परंपराएं

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि, इस संग्रहालय का विजन केवल एक भवन तैयार करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनजातीय और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक अंदाज में दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है.

Advertisement
Lucknow cultural museum Lucknow cultural museum

राजधानी लखनऊ में जल्द ही ऐसा सांस्कृतिक संग्रहालय विकसित होने जा रहा है, जहां उत्तर प्रदेश की जनजातीय विरासत, लोक परंपराएं, संस्कार और भारतीय जीवन दर्शन आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत रूप में देखने को मिलेंगे. इसी क्रम में *'उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्राहलय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर'* परियोजना के निर्माण और क्यूरेशन कार्य के लिए राज्य सरकार ने करीब 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये की धनराशि जारी करने की अनुमति भी दे दी गई है. 

इंटरैक्टिव गैलरियों में जीवंत होगी जनजातीय संस्कृति
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि, इस संग्रहालय का विजन केवल एक भवन तैयार करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनजातीय और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक अंदाज में दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है. यहां प्रदेश की प्रमुख जनजातियों की संस्कृति, परंपराएं, जीवनशैली, आध्यात्मिक सोच और लोक ज्ञान को इंटरैक्टिव गैलरियों के जरिए प्रदर्शित किया जाएगा.

प्रवेश प्लाजा से ओपन थिएटर तक, हर सुविधा में दिखेगी संस्कृति
परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, पार्किंग, स्मारिका केंद्र, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, आवास ब्लॉक, ओपन थिएटर, तालाब, एडमिन ब्लॉक, निगरानी टावर और सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. संग्रहालय का पूरा ढांचा पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक डिजाइन के समन्वय पर आधारित होगा. यहां आने वाले पर्यटक केवल प्रदर्शनी नहीं देखेंगे, बल्कि भारतीय संस्कारों और जीवनचक्र को अनुभव भी कर सकेंगे.

Lucknow cultural museum
Lucknow cultural museum

जन्म से मोक्ष तक भारतीय संस्कारों की दिखेगी झलक
संग्रहालय का सबसे खास हिस्सा उसका क्यूरेशन फ्रेमवर्क होगा, जिसमें जन्म से मृत्यु तक भारतीय जीवन यात्रा और अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों को केंद्र में रखा गया है. आधुनिक तकनीकों जैसे 3D प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, पैनोरमिक वीडियो वॉल, काइनेटिक मूर्तियां और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के जरिए अमूर्त आध्यात्मिक अवधारणाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा. 

पांच तत्वों और वैदिक परंपराओं में दिखेगा भारतीय संस्कार
गैलरी-1 में भारतीय रीति-रिवाजों की उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं और प्रकृति के पांच तत्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ उनके संबंध को दर्शाया जाएगा. यहां 270 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन के माध्यम से ओरिएंटेशन फिल्म दिखाई जाएगी. इसी गैलरी में सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें गर्भाधान, नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे संस्कार शामिल होंगे. होलोग्राफिक प्रोजेक्शन और पीतल की भित्ति चित्रों के माध्यम से इन संस्कारों को आधुनिक और आकर्षक रूप में प्रदर्शित किया जाएगा.

जन्म से गृहस्थ जीवन तक भारतीय संस्कारों यात्रा दिखाएंगी गैलरियां
गैलरी-2 'बनने की यात्रा' पर आधारित होगी, जिसमें जन्म और शिक्षा से जुड़े संस्कारों को दर्शाया जाएगा. गर्भाधान, पुंसवन, सीमंतोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, विद्यारंभ और समावर्तन जैसे संस्कारों को अलग-अलग अनुभव क्षेत्रों में प्रस्तुत किया जाएगा. वहीं गैलरी-3 गृहस्थ जीवन, विवाह और दैनिक अनुष्ठानों को समर्पित होगी. यहां तुलसी पूजा, दीप प्रज्वलन, मंत्र जाप, आरती, गौ सेवा, अतिथि देवो भव और पारंपरिक गृहस्थ जीवन की झलक देखने को मिलेगी. मंदिर की घंटियों से प्रेरित इंस्टॉलेशन, गतिशील प्रकाश शिल्प, तुलसी मंडप और पारंपरिक पूजा सामग्री के प्रदर्शन इस गैलरी को विशेष आकर्षण बनाएंगे.

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि संग्रहालय में एक बाहरी अनुभव क्षेत्र भी विकसित किया जाएगा, जो वानप्रस्थ, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे जीवन के अंतिम चरणों को प्रकृति के माध्यम से समझाएगा. यहां जल धाराओं वाले मार्ग, दीप स्तंभ, यज्ञ कुंड, तैरते दीपक और खुले प्राकृतिक स्थल आध्यात्मिक अनुभव को और मजबूत बनाएंगे. पूरी परियोजना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह केवल संग्रहालय न रहकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत केंद्र बन जाए. यह केंद्र लखनऊ में सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देगा और देश-विदेश के पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा.

ये भी पढ़ें