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Train के AC कोच से चादर-तौलिया चुराने वालों की खैर नहीं! बन रही नई पॉलिसी, चोरी से रेलवे को हो रहा करोड़ों का नुकसान

लगातार हो रही इस चोरी को देखते हुए रेलवे ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अगले दो महीने के भीतर ऐसी नई पॉलिसी तैयार की जाए, जिससे AC कोच से बेडरोल और दूसरे लिनेन की चोरी रोकी जा सके.

Indian Railways distributes bedroll kits to around eight lakh AC passengers every night. Indian Railways distributes bedroll kits to around eight lakh AC passengers every night.
हाइलाइट्स
  • हर दिन बांटे जाते हैं 8 लाख बेडरोल

  • चादर-तौलिया चुराने वालों पर रेलवे सख्त

अगर आप ट्रेन के AC कोच में सफर करते हैं, तो चादर, कंबल, तकिया और तौलिया जरूर इस्तेमाल करते होंगे. लेकिन कई यात्री सफर खत्म होने के बाद इन्हें वापस करने के बजाय अपने साथ ले जाते हैं. यही आदत अब भारतीय रेलवे पर भारी पड़ रही है. लगातार हो रही इस चोरी को देखते हुए रेलवे ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अगले दो महीने के भीतर ऐसी नई पॉलिसी तैयार की जाए, जिससे AC कोच से बेडरोल और दूसरे लिनेन की चोरी रोकी जा सके.

हर दिन 8 लाख बेडरोल यात्रियों को दिए जाते हैं
भारतीय रेलवे का नेटवर्क बहुत बड़ा है. हर दिन AC कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए करीब 8 लाख लिनेन सेट तैयार किए जाते हैं.
एक लिनेन सेट में शामिल होते हैं-

  • 2 बेडशीट

  • 1 तकिया और उसका कवर

  • 1 कंबल

  • 1 फेस टॉवल

यानी हर दिन रेलवे करीब 16 लाख बेडशीट, 8 लाख कंबल, 8 लाख तकिए, 8 लाख तकिया कवर और 8 लाख तौलिए यात्रियों को उपलब्ध कराता है.

चोरी की वजह से बढ़ रहा रेलवे का खर्च
रेलवे के मुताबिक, हर दिन बड़ी संख्या में चादर, कंबल और तौलिए वापस नहीं मिलते. ऐसे में यात्रियों की सुविधा बनाए रखने के लिए नए लिनेन खरीदने पड़ते हैं. इससे रेलवे पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है. रेलवे का कहना है कि भले ही चोरी का प्रतिशत कम हो, लेकिन रोजाना लाखों लिनेन सेट बांटे जाने की वजह से कुल नुकसान काफी बड़ा हो जाता है.

सबसे ज्यादा गायब होते हैं तौलिए
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सबसे ज्यादा फेस टॉवल गायब होते हैं. इनका आकार छोटा होने की वजह से कई बार यात्री इन्हें गलती से अपने बैग में रख लेते हैं. कुछ तौलिए ज्यादा गंदे होने की वजह से दोबारा इस्तेमाल के लायक भी नहीं रहते. इसी कारण तौलियों की बार-बार खरीद करनी पड़ती है.

अभी कैसे होती है निगरानी?
फिलहाल ट्रेन में बेडरोल बांटने और वापस लेने की जिम्मेदारी ठेके पर काम करने वाली एजेंसी की होती है. जब यात्री ट्रेन से उतर जाते हैं, तो कर्मचारी चादर, कंबल और बाकी सामान इकट्ठा करते हैं. अगर गिनती में सामान कम निकलता है, तो उसकी कीमत एजेंसी के भुगतान से काट ली जाती है. इसके बावजूद चोरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है.

नई पॉलिसी में तकनीक का सहारा लिया जा सकता है
रेल मंत्री ने अभी नई पॉलिसी का पूरा खाका नहीं बताया है. लेकिन माना जा रहा है कि इसमें लिनेन की डिजिटल ट्रैकिंग, बेहतर रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था, ठेका एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाने और निगरानी मजबूत करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं. पहले ऐसी चर्चा थी कि नुकसान कम करने के लिए रेलवे 3AC कोच में फेस टॉवल देना बंद कर सकता है. हालांकि रेलवे ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है. यानी यात्रियों को पहले की तरह सभी जरूरी सुविधाएं मिलती रहेंगी, लेकिन चोरी रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी.