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दुनिया के नए नक्शे में भारत कैसा दिखेगा? समर्थन में किया वोट, लेकिन क्यों दी चेतावनी, समझिए

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया का नक्शा बदलने के प्रस्ताव को पास कर दिया है. भारत ने भी इसका समर्थन किया है. हालांकि भारत ने चेतावनी भी दी है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा इलाका भारत के आधिकारिक नक्शे के हिसाब से ही दिखना चाहिए.

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दुनिया का नक्शा बदलने वाला है. इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पास किया है. भारत ने भी इस प्रस्ताव के समर्थन नें वोट किया. जबकि अमेरिका ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट किया. नए नक्शे से किसी देश की सीमा और क्षेत्रफल पर कोई असर नहीं होगा. लेकिन वर्ल्ड मैप में देश का आकार छोटा या बड़ा हो सकता है. नए नक्शे को इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन नाम दिया गया है.

नए नक्शे में कैसा दिखेगा भारत?
दुनिया के नए नक्शे में किसी भी देश की सीमा, क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा. नए नक्शे में देशों का नक्शा छोटा या बड़ा हो सकता है. इस मैप में क्षेत्रफल को सही अनुपात में दिखाया जाएगा. इस मैप में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके छोटेऔर ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं. 

इस नए नक्शे में भारत का नक्शा भी थोड़ा अलग दिखाई देगा. दरअसल भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है. इसलिए पुराने मैप में भी उसका आकार थोड़ा सा छोटा दिखता है. लेकिन नए मैप में भारत के नक्शे में थोड़ा सा बदलाव हो सकता है. भारत का नक्शा थोड़ा सा बड़ा दिख सकता है. भारत का नक्शा कम खिंची हुई दिखाई दे सकती है.

किसपर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
नए मैप का सबसे ज्यादा असर ग्रीनलैंड और अफ्रीका पर होगा. मर्केटर मैप में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के बराबर दिखाई देता है. लेकिन दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है. इसी तरह से मैप में ग्रीनलैंड अफ्रीका के करीब बराबर दिखाई देता है. लेकिन अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है. अफ्रीका का क्षेत्रफल 3 लाख करोड़ वर्ग किलोमीटर है. जबकि ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल 22 लाख वर्ग किलोमीटर है.

किसने की मैप बदलने की मांग?
अफ्रीकी देश टोगे ने यूएन महासभा में पुराना नक्शा बदलने की मांग उठाई थी. इसपर 4 सितंबर को वोटिंग हुई और प्रस्ताव पारित हो गया. इस नक्शे को करेक्ट द मैप नाम दिया गया. अफ्रीकी देशों का कहना है कि मैप में देशों को छोटा-बड़ा दिखाने की नहीं है. दुनिया का मैप ये तय करता है कि हम अलग-अलग जगहों को किस तरह से देखते हैं.

हर देश को मानना होगा ये फैसला?
सभी देशों पर यूएन महासभा से पास इस प्रस्ताव को मानने की बाध्यता नहीं है. यह बदलाव किसी भी देश को अपनी किताबों, स्कूलों से पुराने नक्शे को हटाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है. लेकिन नए मैप से देशों और महाद्वीपों को वास्तविक क्षेत्रफल के हिसाब से समझा जा सकता है.

नए मैप पर भारत ने दी चेतावनी-
यूएन महासभा में भारत ने नए मैप का समर्थन किया है. लेकिन इसके साथ ही भारत ने यूएन को चेतावनी भी दी है. भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत का पूरा इलाका भारत के आधिकारिक नक्शे के हिसाब से ही दिखना चाहिए. भारत के इलाके को गलत तरीके से दिखाना मंजूर नहीं है. भारत की सीमाएं अटल हैं और इससे समझौता नहीं हो सकता.

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