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1867, 1910, 1946... ग्रीनलैंड पर अमेरिका की पहले भी थी नज़र, लेकिन हर बार मिली नाकामी.. आखिर क्यों है इतना अहम

जब अमेरिका ने रूस से अलास्का खरीदा तो विदेश मंत्री विलियम सेवर्ड के तहत अधिकारियों ने आर्कटिक में अपने विस्तार की बड़ी योजना के तहत ग्रीनलैंड को हासिल करने पर चर्चा की. साल 1910 में अमेरिकी राष्ट्रपति विलियम हॉवर्ड टैफ्ट के समय ग्रीनलैंड को अमेरिका में फिर से मिलाने की कोशिश की गई. 1946 में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के प्रशासन ने ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए डेनमार्क को औपचारिक रूप से 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर सोने के रूप में देने की पेशकश की.

Donald Trump Donald Trump

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर चर्चा में हैं. ट्रंप खुलकर यह संकेत दे चुके हैं कि वह ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने की इच्छा रखते हैं. इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

ग्रीनलैंड की सरकार इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर चुके हैं, लेकिन ट्रंप का रुख अब भी अडिग दिखाई देता है. कभी वह अमेरिका की सैन्य ताकत का हवाला देते हैं, तो कभी ग्रीनलैंड के लोगों को आर्थिक फायदे का सपना दिखाते हैं.

अमेरिका पहले भी कर चुका कोशिश
ग्रीनलैंड को हासिल करने की अमेरिकी कोशिश कोई नई नहीं है. यह एक 158 साल पुरानी रणनीतिक सोच का हिस्सा रहा है. इतिहास गवाह है कि अमेरिका कम से कम तीन बार इस द्वीप को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने की कोशिश कर चुका है.

1867 में आर्कटिक मिशन की शुरुआत
रूस से अलास्का खरीदने के तुरंत बाद, तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री विलियम सीवार्ड ने आर्कटिक विस्तार की योजना के तहत ग्रीनलैंड को लेकर विचार किया. उनका मानना था कि यह क्षेत्र कोयले और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है. हालांकि अमेरिकी कांग्रेस ने इसमें खास दिलचस्पी नहीं दिखाई और यह योजना कागज़ों से आगे नहीं बढ़ सकी.

1910 का प्रस्ताव, जमीन के बदले जमीन 
राष्ट्रपति विलियम हॉवर्ड टैफ्ट के कार्यकाल में अमेरिका ने डेनमार्क को जमीन देकर ग्रीनलैंड लेने का प्रस्ताव रखा. डेनमार्क ने इस सुझाव को साफ इनकार कर दिया और यह प्रयास भी इतिहास के पन्नों में दब गया.

1946 में शीत युद्ध और 100 मिलियन डॉलर की पेशकश
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, शीत युद्ध की शुरुआत के दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन की सरकार ने ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व को देखते हुए डेनमार्क को 100 मिलियन डॉलर मूल्य का सोना देने की पेशकश की. युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड पर बने अमेरिकी एयरबेस यूरोप जाने वाले सैन्य विमानों के लिए अहम पड़ाव साबित हुए थे. इसके बावजूद डेनमार्क ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया.

क्यों ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए इतना अहम?
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति ही उसे अमेरिका के लिए रणनीतिक खजाना बनाती है. यह अटलांटिक महासागर और आर्कटिक क्षेत्र को जोड़ने वाले बेहद अहम नौसैनिक मार्ग पर स्थित है. यहां पहले से मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डा मिसाइल डिफेंस सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

ग्रीनलैंड का बड़ा हिस्सा आर्कटिक सर्कल के भीतर आता है. एक ऐसा क्षेत्र जहां वैश्विक महाशक्तियां सैन्य और व्यापारिक वर्चस्व के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं. अमेरिका नहीं चाहता कि इस इलाके में उसका प्रभाव कमजोर पड़े. साथ ही ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स का विशाल भंडार मौजूद है, जो बैटरी, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और आधुनिक तकनीक के लिए बेहद जरूरी हैं.