श्री अमरनाथ यात्रा देश की सबसे पवित्र और कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है. जम्मू-कश्मीर की ऊंची हिमालयी पहाड़ियों में स्थित अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था. यही वजह है कि इस यात्रा का धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है.
यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए अनंतनाग पुलिस, सेना, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार तैनात रहती हैं. पहाड़ी रास्तों पर माउंटेन रेस्क्यू टीमें (MRT) हर समय मदद के लिए तैयार रहती हैं. रास्तों पर मेडिकल कैंप, कंट्रोल रूम और आपातकालीन सेवाओं की भी व्यवस्था की गई है. प्रशासन की कोशिश है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित, सुविधाजनक और शांतिपूर्ण तरीके से बाबा बर्फानी के दर्शन कर सके.
साल 2026 में श्री अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और 28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन) तक चलेगी. करीब 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में श्रद्धालु दो प्रमुख मार्गों- पहलगाम और बालटाल से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते हैं. यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वास्थ्य और मौसम को देखते हुए प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं.
अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए पहले से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है. श्रद्धालु अधिकृत बैंकों की शाखाओं में जाकर या श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के समय वैध पहचान पत्र और अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (Compulsory Health Certificate) जमा करना जरूरी होता है. बिना वैध रजिस्ट्रेशन यात्रा की अनुमति नहीं दी जाती.
यात्रा कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरती है, इसलिए अच्छी शारीरिक फिटनेस जरूरी है. मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए गर्म कपड़े, रेनकोट, दवाइयां और जरूरी सामान साथ रखें. प्रशासन और सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करें और निर्धारित मार्ग से ही यात्रा करें. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तुरंत मेडिकल टीम से संपर्क करें.