प्यार का एहसास काफी खास होता है. खास कर तब जब इजहार करना हो. इजहार केवल इश्क का नहीं उस एहसास का जो न तो छिपता है और न कबूल करते बनता है.
तुमसे बात हो जाए तो दिन अच्छा गुजर जाता है,
वरना दिल यूं ही हर बात पर उलझ जाता है.
ना जाने कैसा असर है तुम्हारी बातों का,
तुम्हारा नाम सुनते ही मेरा चेहरा खिल जाता है.
तुम्हें चाहना आदत नहीं, इबादत सा लगता है,
तुम्हारा केवल ख्याल ही दिल को राहत दे जाता है.
लोग पूछते हैं क्या खास है उसमें,
अब क्या बताएं, उसके बिना भी कुछ कहां अच्छा लगता है.
तूम नजरों से देखती हो तो मेरा सारा
बुखार उतर जाता है.
तुम्हारी आंखों में देख कर दिन बिताना अच्छा लगता है.
सोचता हूं तुम्हारे बिना मेरा क्या होगा?
तुम्हारे बिना मैं खुद को भटका हुआ पाता हूं.
एक अजीब सी खुशी मिलती है तुम्हें सोचकर,
जैसे चलते-चलते कोई अपना मिल गया हो.
दिल चाहता है बस इतना सा हक मिले,
सुबह तुम्हें देख कर शुरू करूं और तुम्हें महसूस करके रात करूं.
मेरा इश्क इबादत, तू पाक खुदा सा.
तुझे सोचूं तो दिल लगे रौशन दिया सा.
ना मांगा तुझे किस्मत से, ना कोई शिकायत करूं कभी,
बस तू सलामत रहे, बस यही है मेरी दिल की दुआ.
तुम्हें पाने की जिद नहीं है,
बस तुम्हें खोने का डर लगता है.
क्योंकि जो दिल में घर बना ले,
उसे भुलाना आसान नहीं होता.
तुम्हारी हंसी पर मेरा दिल आज भी ठहर जाता है,
तुम्हारा नाम सुनते ही सब अच्छा लगने लगता है.
ये प्यार है या कुछ और, पता नहीं,
पर तुम्हें सोचकर मेरा दिल जरूर मुसकुरा उठता है.
इतनी आदत मत लगाओ अपनी,
कि तुम्हारे बिना दिल कहीं लगे ही नहीं.
और अगर तुम्हें एक दिन मुझसे सच में प्यार हो गया, तो फिर ये मत कहना कि बताया ही नहीं.
अगर कभी तुम्हें मेरी याद बिना वजह आए,
तो समझ लेना कुछ कनेक्शन का पहरा है.
क्योंकि दिल अकसर वहीं उलझता है,
जहां रिश्ता थोड़ा भी गहरा हो.
अगर कभी मेरी बातें याद आ जाएं,
तो थोड़ा मुस्कुरा लेना.
क्या पता मेरा दिल,
उस वक्त चुपके से तुम्हें ही सोच रहा हो