धर्म

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर भक्त क्यों नहीं रखते पैर? जानें क्या है इसके पीछे की मान्यता

gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 15 जुलाई 2026,
  • Updated 4:33 PM IST
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ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है और अपनी धार्मिक मान्यताओं, रहस्यों व चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. हर साल निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. इस साल रथ यात्रा 16 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित की जाएगी. मंदिर से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं हैं जो आज भी लोगों को हैरान करती हैं. इन्हीं में से एक है मंदिर की तीसरी सीढ़ी का रहस्य. कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु इस सीढ़ी पर पैर नहीं रखते. तो चलिए आज आपको बताते हैं आखिर इसके पीछे क्या वजह है.

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जगन्नाथ मंदिर में क्यों चढ़नी पड़ती हैं 22 सीढ़ियां
भगवान जगन्नाथ के मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 22 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. इन सीढ़ियों को 'बैसी पहाचा' कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार ये 22 सीढ़ियां मनुष्य के जीवन की 22 कमजोरियों और बुराइयों का प्रतीक मानी जाती हैं. माना जाता है कि जो व्यक्ति इन बुराइयों पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह मोक्ष के मार्ग की ओर बढ़ता है. इसलिए इन सीढ़ियों का आध्यात्मिक महत्व भी बहुत खास माना जाता है.

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क्या है तीसरी सीढ़ी का रहस्य
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय ऐसा आया जब भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से लोगों के पाप समाप्त होने लगे. इससे यमलोक में आने वाले लोगों की संख्या कम हो गई. तब यमराज भगवान जगन्नाथ के पास पहुंचे और अपनी चिंता व्यक्त की.

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कथा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ ने यमराज से कहा कि वे मंदिर के मुख्य द्वार की तीसरी सीढ़ी पर अपना स्थान ग्रहण करें. इस सीढ़ी को 'यम शिला' कहा जाने लगा. मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने के बाद इस शिला पर पैर रख देता है, तो उसके दर्शन से प्राप्त सभी पुण्य समाप्त हो जाते हैं और उसे यमलोक जाना पड़ता है.

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इसलिए तीसरी सीढ़ी से बचते हैं श्रद्धालु
इसी धार्मिक मान्यता के कारण आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर पैर रखने से बचते हैं. हालांकि यह मान्यता पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित है. आस्था रखने वाले भक्त इसे श्रद्धा के साथ मानते हैं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन के दौरान इस परंपरा का पालन करते हैं.