आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में मंगलवार सुबह से ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में स्नान कर दान-पुण्य और पितृ तर्पण किया. मंगलवार का संयोग होने की वजह से इस अमावस्या को भौमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है. श्रद्धालुओं ने मां गंगा में डुबकी लगाकर अपने और अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की.
भोर होते ही श्रद्धालुओं का त्रिवेणी संगम पहुंचना शुरू हो गया. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में हजारों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई. सुबह से ही संगम तट पर स्नान करने वालों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे घाट पर धार्मिक माहौल बना रहा.
इस बार आषाढ़ अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ने से इसका महत्व और बढ़ गया है. मंगलवार के संयोग में आने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा जाता है. उदया तिथि के आधार पर श्रद्धालु स्नान, दान और पितरों के निमित्त तर्पण कर रहे हैं, जिसे बेहद शुभ माना जाता है.
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पितरों की शांति के लिए तर्पण किया. इसके साथ ही श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य भी कर रहे हैं. संगम तट पर पूरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम लगातार जारी रहा.
मां गंगा में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने अपने और अपने परिवार के सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की. बड़ी संख्या में लोग दूर-दराज के इलाकों से भी संगम पहुंचे और पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना में शामिल हुए.
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए संगम क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. पुलिस, जल पुलिस और मेला प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि स्नान के दौरान किसी तरह की असुविधा या अव्यवस्था न हो और श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से अपने धार्मिक अनुष्ठान पूरे कर सकें.