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हरिद्वार से लौटते कांवड़ियों का पसंदीदा पड़ाव बना सोरना मेला, रंग-बिरंगी दुकानों और खरीदारी की रौनक ने मेले में लगाया चार चांद

राहुल कुमार
  • सहारनपुर ,
  • 06 अगस्त 2026,
  • Updated 5:40 PM IST
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सहारनपुर में सावन के पावन महीने के दौरान कांवड़ यात्रा के साथ-साथ सोरना गांव का पारंपरिक कांवड़ मेला भी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

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हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले हजारों कांवड़िए इस मेले में पहुंचकर विश्राम करते हैं और पूरे दिन मेले का आनंद उठाते हैं. करीब 19 से 20 वर्षों से लग रहा यह मेला अब गांव की पहचान बन चुका है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

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मेले में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए आकर्षण का विशेष इंतजाम किया गया है. बच्चों के लिए मिकी माउस, डायनासोर, पंचिंग झूले, हिंडोला समेत कई तरह के झूले लगाए गए हैं. वहीं खिलौनों, कपड़ों, श्रृंगार सामग्री, घरेलू उपयोग के सामान और खाने-पीने की सैकड़ों दुकानें भी सजी हैं. 

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रंग-बिरंगी रोशनी और मेले की रौनक श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सव के माहौल में नजर आता है. ग्रामीणों के अनुसार यह मेला सिर्फ मनोरंजन का नहीं बल्कि आस्था और परंपरा का भी प्रतीक है. गांव में वर्षों से अखंड भंडारे की परंपरा चली आ रही है. 

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ग्रामीण बताते हैं कि जब बाबा बंसी वाले यहां आए थे, तब भंडारे के दौरान घी समाप्त हो गया था. बाबा के कहने पर हेडपंप का पानी कड़ाही में डाला गया और वह घी में बदल गया. बाद में जब घी पहुंचा तो उसे फिर हेडपंप में डाल दिया गया. तभी से इस चमत्कार की मान्यता के साथ यहां अखंड भंडारा चलता आ रहा है और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु इस परंपरा में अपनी आस्था व्यक्त करते हैं.

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