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Badaun Lok Sabha Seat: यादव-मुस्लिम समीकरण के दम पर समाजवादी पार्टी ने 6 बार दर्ज की जीत, 2019 आम चुनाव में बीजेपी पड़ी भारी... बदायूं लोकसभा सीट का इतिहास जानिए

Lok Sabha Election 2024: बदायूं लोकसभा सीट पर यादव और मुस्लिम का समीकरण किसी भी पार्टी को जीत दिला सकता है. इस समीकरण के बल पर समाजवादी पार्टी इस सीट पर 6 बार जीत दर्ज करने में कामयाब रही है. अखिलेश यादव की पार्टी का बदायूं में साल 1996 से 2019 तक कब्जा रहा. लेकिन साल 2019 आम चुनाव में बीजेपी ने ये सीट जीत ली.

Badaun Lok Sabha Seat Badaun Lok Sabha Seat

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 270 किलोमीटर दूर एक शहर बसा है - बदायूं. बदायूं लोकसभा सीट (Badaun Lok Sabha Seat) भी है. शरद यादव से लेकर चिन्मयानंद तक इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इस सीट पर साल 1996 से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का कब्जा था, लेकिन साल 2019 आम चुनाव में बीजेपी (BJP) ने इस सीट को जीत लिया. इस सीट का जातीय समीकरण ऐसा है, जो समाजवादी पार्टी के लिए मुफीद है. चलिए 14 लाख की आबादी वाले बदायूं लोकसभा सीट का समीकरण और इतिहास बताते हैं.

बदायूं सीट से कौन-कौन मैदान में-
यूपी में एनडीए (NDA) और इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) के बीच मुकाबला है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) अकेले मैदान में है. इंडिया गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी ने शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) को उम्मीदवार बनाया है. हालांकि एनडीए (NDA) की तरफ से ये सीट बीजेपी के खाते में है. लेकिन अभी तक बीजेपी ने इस सीट पर उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है. उधर, बीएसपी (BSP) ने बाहुबली डीपी यादव (D P Yadav) को मैदान में उतारा है. 

2019 आम चुनाव में बीजेपी की जीत-
साल 2019 आम चुनाव में बीजेपी ने इस सीट पर 18454 वोटों से जीत हासिल की. बीजेपी ने स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य को मैदान में उतारा था. जबकि समाजवादी पार्टी ने मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव को उम्मीदवार बनाया था. जबकि कांग्रेस ने 5 बार के सांसद सलीम इकबाल शेरवानी को मैदान में उतारा था. संघमित्रा मौर्य को 5 लाख 11 हजार 352 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 4 लाख 92 हजार 898 वोट हासिल हुए थे.

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बदायूं लोकसभा सीट का इतिहास-
बदायूं लोकसभा सीट पर साल 1952 में कांग्रेस के बदन सिंह ने जीत दर्ज की थी. उसके बाद साल 1957 में कांग्रेस के रघुबीर सहाय को जीत मिली. लेकिन साल 1962 में ये सीट भारतीय जनसंघ के पास चली गई. जनसंघ के उम्मीदवार ओंकार सिंह ने जीत दर्ज की और साल 1967 आम चुनाव में भी इस सीट को बरकरार रखा. लेकिन साल 1971 में कांग्रेस के करण सिंह यादव विजय हुए.

साल 1977 में जनता पार्टी को इस सीट पर जीत मिली. जनता पार्टी के ओंकार सिंह ने जीत हासिल की. लेकिन 1980 में कांग्रेस ने जनता पार्टी से जीत छीन ली. कांग्रेस के उम्मीदवार मोहम्मद असरार अहमद ने जीत दर्ज की. साल 1984 में कांग्रेस ने पहली सलीम इकबाल शेरवानी को मैदान में उतारा. उन्होंने जीत दर्ज की. लेकिन साल 1989 में जनता दल के शरद यादव सांसद चुने गए. साल 1991 में पहली बार इस सीट पर बीजेपी को जीत मिली थी. बीजेपी के स्वामी चिन्मयानंद सांसद चुने गए थे.

समाजवादी पार्टी का दो दशक तक कब्जा-
साल 1996 आम चुनाव में समाजवादी पार्टी को इस सीट पर पहली बार जीत मिली. सलीम इकबाल शेरवानी ने जीत हासिल की. इसके बाद साल 2004 तक लगातार 4 बार सलीम शेरवानी सांसद चुने गए. लेकिन साल 2009 आम चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बदल दिया. मुलायम सिंह ने अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा. धर्मेंद्र यादव ने बीएसपी उम्मीदवार डीपी यादव को हराया. साल 2014 आम चुनाव में भी धर्मेंद्र यादव इस सीट पर जीतने दर्ज करने में कामयाब रहे. लेकिन दूसरे नंबर बीजेपी के वागीश पाठक रहे. साल 2019 आम चुनाव में बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव को हरा दिया.

5 विधानसभा सीटों का गणित-
बदायूं लोकसभा क्षेत्र में 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इसमें गुन्नौर, बिसौली, सहसवान, बिल्सी और बदायूं शामिल हैं. साल 2022 विधानसभा चुनाव में 3 सीटों पर समाजवादी पार्टी और 2 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी. समाजवादी पार्टी ने गुन्नौर, बिसौली और सहसवान से जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी को बिल्सी और बदायूं में जीत मिली थी. बिल्सी से बीजेपी के उम्मीदवार हरीश शाक्य और बदायूं से महेश चंद्र गुप्ता विधायक चुने गए थे. गुन्नौर से रामखिलाड़ी सिंह यादव, बिसौली से आशुतोष मौर्य और सहसवान से ब्रजेश यादव चुनाव जीते हैं.

इस सीट का जातीय समीकरण-
जातीय समीकरण के चलते बदायूं लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी भारी नजर आती है. इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या करीब 14 लाख है. इस सीट पर सबसे ज्यादा यादव और मुस्लिम वोटर्स की संख्या है. सबसे ज्यादा यादव समुदाय के 4 लाख वोटर हैं. जबकि मुस्लिम वोटर्स की संख्या 3.5 लाख है. बदायूं में गैर-यादव ओबीसी वोटर्स की संख्या 2.5 लाख है. वैश्य और ब्राह्मण समुदाय के मतदाताओं की संख्या 2.5 लाख है. इस सीट पर दलित वोटर पौने दो लाख हैं.

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