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सिक्किम में सिखों की राह आसान, आज से लागू हुआ 'आनंद मैरिज एक्ट, 1909'.. आनंद कारज रस्म के तहत शादी हो पाएंगी रजिस्टर

सिक्कम में 'आनंद मैरिज एक्ट, 1909' लागू हो चुका है. इसके बाद सिख अपने पारंपरिक आनंद कारज रिति के तहत हुई शादी को रजिस्टर करवा पाएंगे.

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देश के सिक्किम राज्य में 1 जून 2026 से आनंद मैरिज एक्ट, 1909 लागू हो गया है. इस फैसले के बाद अब सिख समुदाय के लोग अपने पारंपरिक आनंद कारज विवाह को सीधे उसी कानूनी व्यवस्था के तहत रजिस्टर करा सकेंगे. अब तक राज्य में स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण कई सिख परिवारों को अपने विवाह हिंदू मैरिज एक्ट के तहत दर्ज कराने पड़ते थे.

केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि सिक्किम में आनंद मैरिज एक्ट को लागू किया जाएगा. इसके लिए राज्य सरकार ने 'सिक्किम आनंद मैरिज रजिस्ट्रेशन रूल्स 2026' भी तैयार कर लिए हैं. इसके जरिए विवाह पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया तय होगी. इस फैसले को सिख समुदाय के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब उनकी धार्मिक परंपराओं को अलग कानूनी पहचान मिलेगी.

क्या है आनंद मैरिज एक्ट?
आनंद मैरिज एक्ट 1909 में बनाया गया था. यह कानून सिख धर्म के अनुसार होने वाले विवाह यानी आनंद कारज को कानूनी मान्यता देता है. आनंद कारज सिख समुदाय की पारंपरिक विवाह रस्म है, जो गुरु ग्रंथ साहिब की मौजूदगी में पूरी की जाती है. हालांकि यह कानून काफी पुराना है, लेकिन कई राज्यों में इसके तहत विवाह रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था साफ नहीं थी. इसी कारण सिख जोड़ों को हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत शादी रजिस्टर करानी पड़ती थी.

आखिर क्या होता है आनंद कारज?
आनंद कारज का मतलब होता है खुशी का कार्य. यह विवाह सिख धर्म की परंपराओं के अनुसार किया जाता है. इसमें हिंदू विवाह की तरह कुंडली मिलान, मुहूर्त या नक्षत्र देखने जैसी चीजें जरूरी नहीं मानी जातीं. इस विवाह में गुरु ग्रंथ साहिब के सामने अरदास और धार्मिक पाठ होता है. शादी के दौरान सभी लोगों के सिर ढके होना जरूरी माना जाता है. महिलाएं दुपट्टा और पुरुष पगड़ी पहनते हैं.

चार फेरों का होता है खास महत्व
आनंद कारज में दूल्हा-दुल्हन गुरु ग्रंथ साहिब के चार फेरे लेते हैं, जिन्हें लावां कहा जाता है. हर फेरे का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है. पहले फेरे में अच्छे कर्म और नाम जपने की सीख दी जाती है. दूसरे फेरे में सच्चे गुरु के मार्ग पर चलने का संदेश होता है. तीसरे फेरे में गुरु की वाणी और संगत का महत्व बताया जाता है. वहीं चौथे और अंतिम फेरे में आत्मिक शांति और ईश्वर से जुड़ने की बात कही जाती है.

नए नियम से क्या होगा फायदा?
इस कानून के लागू होने के बाद सिख विवाहों को अलग और स्पष्ट कानूनी पहचान मिलेगी. इससे विवाह रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान होगी और दस्तावेजों में भी कम परेशानी आएगी.इसके अलावा यह कदम सिख समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.