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38 साल की उम्र में पहली बार गया जिम.. Mr. India का जीता खिताब, दिल्ली की सड़क पर नान का ठेला लगाता है ये चैंपियन

मनीष चौरसिया
  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • Updated 5:45 PM IST
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कहते हैं कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, लेकिन कई बार हालात ऐसे होते हैं कि बड़े से बड़ा हुनर भी गुमनामी में रह जाता है. बिहार के छपरा के रहने वाले एक ऐसे ही खिलाड़ी की कहानी इन दिनों लोगों को भावुक भी कर रही है और प्रेरित भी. जिन्होंने बॉडीबिल्डिंग में कई खिताब जीते, लेकिन आज परिवार का पेट पालने के लिए दिल्ली की सड़कों पर नान का ठेला लगाने को मजबूर हैं. राजकुमार बॉडीबिल्डिंग में Mr India का ख़िताब जीत चुके हैं.

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राज कुमार बिहार के छपरा के रहने वाले एक प्रतिभाशाली बॉडीबिल्डर हैं. खेल की दुनिया में राज कुमार ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि 12 चैंपियनशिप अपने नाम की हैं. अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने बॉडी बिल्डिंग की दुनिया में पहचान भी बनाई और मिस्टर इंडिया चैंपियन का खिताब भी जीता.

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राजकुमार का बचपन बेहद गरीबी में बीता. राजकुमार बताते हैं कि भूख और पैसे की तंगी की वजह से कई बार माँ ने मुझे लेकर आत्महत्या करने की कोशिश की. राजकुमार कहते हैं कि वो बचपन से ही बॉडी बिल्डिंग करना चाहते थे लेकिन पैसों की तंगी की वजह से वो कभी जिम नहीं जा सके. जब राजकुमार ने नान का ठेला लगाया उसके बाद वो जिम जाने भर के पैसे इकट्ठा कर पाए. राजकुमार बताते हैं कि जब वो पहली बार जिम गए तब उनकी उम्र 38 साल थी...

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यहीं से राजकुमार से कॉमेपटीशन में हिस्सा लेना शुरु किया. राजकुमार का जुनून देखकर जिम के ट्रेनर ने उन्हें फ्री में ट्रेन करना शुरू किया. जल्द ही राजकुमार ने एक के बाद एक कई कॉम्पटीशन जीते.

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राजकुमार बताते हैं कि जब 38 साल की उम्र में जिम शुरु किया तो घरवाले बोले पागल हो गए हो क्या बुढ़ापे में जिम करने जा रहे हो.. राजकुमार को ट्रेन करना वाले कोच बताते हैं कि राजकुमार में एक अलग बात है वो कभी थकता ही नहीं. नान के ठेले पर 8-9 घंटे काम करने के बाद भी वो ऐसे जिम करता है जैसे बिल्कुल थका ही न हो.

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राज कुमार की कहानी एक बार फिर यह याद दिलाती है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई बार सही पहचान और सहयोग न मिलने की वजह से कई हुनर गुमनामी में खो जाते हैं. राजकुमार को लोगों के सपोर्ट की ज़रूरत है. वो कहते हैं कि अब मैं इंटरनेश्नल खेलना चाहता हूं. वेदेश में तिरंगा लहराना चाहता हूं.