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धर्म

54 किलोग्राम चांदी से सजी 54 फीट लंबी कांवड़, 600 कांवड़िए स्पेशल कांवड़ लेकर चले बाबाधाम

गोविंद कुमार
  • मुंगेर,
  • 05 अगस्त 2026,
  • Updated 4:50 PM IST
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श्रावणी मेले के अवसर पर मुंगेर के असरगंज कच्ची कांवरिया पथ पर बाबा बैधनाथ की जय-जयकार करते हुए भक्त जा रहे हैं. पटना सिटी से विशाल शिवधारी कांवड़िया संघ के 600 से अधिक श्रद्धालुओं का जत्था 54 फीट की आकर्षक कांवड़ लेकर अजगैबीनाथ धाम से देवघर के लिए रवाना हुआ. भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ नाचते-गाते, ढोल-नगाड़ों की गूंज और बोल बम के नारों के साथ माहौल को भक्तिमय कर दिया है. कांवड़ की सबसे खास बात इसकी लंबाई और उसमें इस्तेमाल की गई चांदी है. कांवड़ 54 फीट लंबी है और इसमें 54 किलो चांदी का उपयोग किया गया है. 

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इस कांवड़ में बाबा बैद्यनाथ का ज्योतिर्लिंग, बड़ी दुर्गा मां और काली मां की प्रतिमा है. चांदी से ही बाबा बैधनाथ मंदिर और महागौरी मंदिर की खूबसूरत कलाकृति भी तैयार की गई है. जिसने देखने वालों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. 

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संघ के सदस्यों का कहना है कि बैधनाथ धाम में दोनों मंदिरों के बीच की दूरी 54 फीट है. इसीलिए कांवड़ भी 54 फीट लंबी बनाई गई है. 

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विशाल शिवधारी संघ के सदस्य मनीष कुमार ने बताया कि साल 2008 से वे हर साल इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं. उनका मकसद है कि शिवभक्ति के इस उत्सव को न केवल भव्य बनाया जाए बल्कि श्रद्धालुओं को एकजुट कर बाबा की आराधना की जाए.

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संघ के एक सदस्य ने बताया कि हम हर साल इसी श्रद्धा और उमंग से निकलते हैं. यह सिर्फ यात्रा नहीं बाबा के प्रति हमारी आस्था और सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन है. श्रद्धालुओं का कहना है कि वे 54 घंटे में देवघर स्थित बाबा बैधनाथ धाम पहुंच जाते हैं. यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालु नियम और अनुशासन का पालन करते हैं. भोजन, विश्राम और भजन-कीर्तन की पूरी व्यवस्था संघ की ओर से की जाती है.

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सुल्तानगंज अजगैबीनाथ धाम से यात्रा की शुरुआत हुई है. जहां श्रद्धालुओं ने पहले गंगाजल भरा और फिर सामूहिक रूप से जयकारे लगाते हुए कांवड़ उठाया. गंगाजल लेकर नंगे पांव, केसरिया वस्त्रों में, सिर पर रुद्राक्ष की माला और भस्म लगाए श्रद्धालुओं की टोली पूरे रास्ते में शिवभक्ति का रंग घोल रही है.

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