सावन का महीना शुरू होते ही झारखंड के देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम शिवभक्तों से गुलजार हो जाता है. 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
बाबा वैद्यनाथ को जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालु सीधे गंगाजल नहीं लाते. वे बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल भरते हैं और करीब 105 से 118 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा पूरी कर देवघर पहुंचते हैं. इसी परंपरा को सबसे पवित्र माना जाता है. सुल्तानगंज में गंगा नदी उत्तर दिशा की ओर बहती है, जिसे 'उत्तरवाहिनी गंगा' कहा जाता है. शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए यहां का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है.
सुल्तानगंज से आगे का रास्ता पहाड़ियों और लंबे पैदल मार्ग से होकर गुजरता है. इसके बावजूद शिवभक्तों का उत्साह कम नहीं होता. बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, हर कोई पूरे उत्साह से साथ 'बोल बम' के जयकारों के साथ यह यात्रा पूरी करता है और कांवड़िया सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर तक बिना कांवड़ को जमीन पर रखे यात्रा पूरी करते हैं.
पूरे कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह शिविर लगाए जाते हैं. यहां कांवड़ियों को भोजन, पानी, दवा और आराम की व्यवस्था मिलती है. सावन में सेवा भाव की यह परंपरा भी इस यात्रा और सेवा भाव की सबसे बड़ी खूबसूरती है.
धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा वैद्यनाथ पर अर्पित करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालु वहां बने गंगा आलय में स्नान कर शुद्ध मन से बाबा का जलाभिषेक करते हैं.
मान्यता है कि सावन जैसे पवित्र महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से बाबा वैद्यनाथ की पूजा करने वाले भक्तों पर भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.