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नेपाल की बाढ़ में लॉकर से निकला 50 करोड़ नेपाली रुपए का सोना, डेढ़ करोड़ कैश, देखें PHOTOS

पंकज दास
  • काठमांडू,
  • 31 अगस्त 2026,
  • Updated 11:15 AM IST
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नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने ऐसा कहर बरपाया कि नुवाकोट के त्रिशूली इलाके में कृषि विकास बैंक की एक शाखा पूरी तरह पानी और मलबे में डूब गई. कई दिन बाद जब पानी कुछ कम हुआ तो बैंक के अंदर रखी करोड़ों की संपत्ति निकालने के लिए पुलिस और बचाव दल ने मोर्चा संभाला. करीब 8 घंटे चले अभियान में 50 करोड़ नेपाली रुपए कीमत का सोना, करीब डेढ़ करोड़ रुपए नकद, चांदी और अन्य कीमती सामान सुरक्षित बाहर निकाला गया.

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पानी-मलबे के बीच बैंक तक पहुंचना भी मुश्किल था
पुलिस के मुताबिक, 10 भाद्र को आई बाढ़ से कृषि विकास बैंक की त्रिशूली-ढुंगे शाखा बुरी तरह प्रभावित हुई थी. बाढ़ का पानी बैंक के अंदर तक पहुंच गया था. कई जगह मलबा जमा था और लॉकर तक पहुंचना आसान नहीं था. बचाव दल को हर कदम पर पानी और मलबे के बीच काम करना पड़ा. इसके बावजूद टीम ने लगातार अभियान चलाकर बैंक की संपत्ति को एक-एक करके बाहर निकाला.
 

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सोना-कैश के साथ जरूरी दस्तावेज भी बचाए
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बैंक से करीब 50 करोड़ नेपाली रुपए मूल्य का सोना बरामद हुआ. इसके अलावा लगभग 1.5 करोड़ नेपाली रुपए नकद, चांदी और दूसरी कीमती वस्तुएं भी सुरक्षित निकाली गईं. बैंक के जरूरी दस्तावेजों को भी नुकसान से बचाकर सुरक्षित जगह पहुंचाया गया. इतनी बड़ी संपत्ति के सुरक्षित निकलने के बाद बैंक अधिकारियों और प्रशासन ने राहत की सांस ली.
 

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भोटेकोशी की बाढ़ ने कई इलाकों में मचाई तबाही
भोटेकोशी नदी में अचानक आई तेज बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. तेज बहाव से सड़कें डूब गईं और कई जगह पानी के साथ मलबा भर गया. प्रभावित इलाकों तक पहुंचना और वहां राहत पहुंचाना भी मुश्किल हो गया. इसी वजह से बैंक में फंसी संपत्ति को निकालने का अभियान भी जोखिम भरा था.
 

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बाढ़ में अब तक 781 मौतें, 9,435 लोगों को बचाया गया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के मुताबिक, पिछले पांच दिनों से जारी इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 781 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं हवाई और सड़क मार्ग से 9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भोटेकोशी बाढ़ से हुई पूरी जन-धन और भौतिक क्षति का आकलन अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. खराब मौसम और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राहत-बचाव का काम जारी है.
 

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