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Wayanad Lok Sabha Seat: वायनाड में कांग्रेस लगा पाएगी जीत का चौका या बीजेपी का खुलेगा खाता, जानिए राहुल गांधी के सामने कौन और क्या है इस सीट का इतिहास और समीकरण

Wayanad Lok Sabha Seat: वायनाड लोकसभा सीट से एक बार फिर राहुल गांधी ताल ठोकते नजर आ रहे हैं. इस सीट से 2019 चुनाव में उन्हें बंपर वोटों से जीत मिली थी. परिसीमन के बाद यहां तीन चुनाव हुए हैं और तीनों में कांग्रेस ने ही जीत दर्ज की है.

Wayanad Lok Sabha Seat Wayanad Lok Sabha Seat

केरल की वायनाड लोकसभा सीट (Wayanad Lok Sabha Seat) न सिर्फ प्रदेश की बल्कि देश की सबसे चर्चित सीटों में से एक है. वजह है यहां से राहुल गांधी का चुनाव लड़ना. 2019 चुनाव से पहले इस सीट के बारे में शायद ही देश में चर्चा हुई हो. लेकिन जैसे ही राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने यहां से लड़ने का ऐलान किया लोग इस सीट के बारे में जानने के इच्छुक हो गए कि आखिर राहुल ने इस सीट को ही क्यों चुना. 2019 में रिकॉर्ड मतों से जीते राहुल ने 2024 चुनाव (Lok Sabha Election 2024 ) के लिए नामांकन दाखिल किया है. इस सीट पर दूसरे चरण में 26 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. ऐसे में हम आपको इस सीट के बारे में विस्तार से बताते हैं और वजह भी बताते हैं कि आखिर बैक टू बैक राहुल इस सीट से ही क्यों चुनाव लड़ रहे हैं.

एनी राजा और के सुरेंद्रन से है मुकाबला

वायनाड सीट से बीजेपी ने के सुरेंद्रन और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया  (CPI) ने एनी राजा का टिकट दिया है. राहुल गांधी का इन्हीं दोनों नेताओं से मुकाबला होने जा रहा है. सबसे पहले आपको इन दोनों नेताओं के बारे में आपको बता देते हैं.

एनी राजा (CPI)

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एनी राजा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन की महासचिव और पार्टी महासचिव डी राजा की पत्नी हैं. वामपंथी राजनीति में काफी मशहूर हैं. बता दें कि 60 वर्षीय एनी पहली बार चुनाव लड़ रही है. देश के बाकी हिस्सों में वैसे तो CPI इंडिया एलायंस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है लेकिन केरल की बात अलग है. यहां कांग्रेस का सामना सहयोगी पार्टी के उम्मीदवार से होने जा रहा है.

के सुरेंद्रन (BJP)

बीजेपी ने इस बार के सुरेंद्रन पर भरोसा जताया है. वे फिलहाल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं. छात्र संगठन एबीवीपी से राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले सुरेंद्रन पर 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं.इनमें से ज्यादातर मामले 2018 में हुए सबरीमाला विरोध प्रदर्शन से संबंधित हैं. इससे पहले तीन बार लोकसभा चुनाव में और 5 बार विधानसभा चुनाव में सुरेंद्रन किस्मत आजमा चुके हैं. और हर बार हार ही मिली है.

2009, 2014 का जनादेश

साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद पहली बार 2019 में यहां चुनाव हुए थे.इस चुनाव में कांग्रेस के एमआई शानावास ने जीत दर्ज की थी. शानावास को 4 लाख 10 हजार 703 वोट मिले थे तो वहीं दूसरे नंबर पर रहे  सीपीआई के एम रहमतुल्ला को 1 लाख 53 हजार 439 वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में शनावास को फिर से जीत मिली. इस बार उन्होंने सीपीआई के पीआर सत्यन मुकरी को हराया था. 

2019 में राहुल की रिकॉर्ड तोड़ वोट से जीत

2009 से लगातार जीतती आ रही कांग्रेस को 2019 में भी यहां से सफलता मिली. राहुल गांधी बंपर वोटों से जीते. हालांकि इस चुनाव में एक तरफ राहुल जीते तो दूसरी तरफ करारी हार मिली.  परंपरागत सीट अमेठी से बीजेपी की स्मृति ईरानी ने उन्हें हरा दिया. खैर अमेठी को यहीं छोड़ते हैं और बात वायनाड की करते हैं. तो 2019 के चुनाव में राहुल गांधी ने CPI के पीपी सुनीर को 4 लाख से अधिक वोटों से  शिकस्त दी. राहुल को जहां 7 लाख 6 हजार 367 वोट मिले थे तो वहीं सुनीर को 2 लाख 74 हजार 597 वोट प्राप्त हुए थे.     

विधानसभा सीट और समीकरण

3 जिलों (कोज़ीकोड, मलाप्पुरम और वायनाड) से मिलकर बने वायनाड लोकसभा सीट के अंतर्गत 7 विधानसभा क्षेत्र हैं. 2019 में वोटरों की संख्या 10 लाख 92 हजार 197 थी. जिनमें पुरुष 5 लाख 29 हजार 74 और महिला मतदाता 5 लाख 60 हजार 841 थी. अल्पसंख्यक वोटरों की संख्या ज्यादा होने की वजह से ये सीट कांग्रेस के लिए सेफ मानी जाती है. और राहुल गांधी के यहां से चुनाव लड़ने के पीछे की वजह भी यही बताई जाती है.