scorecardresearch

दास्तां-ए-सरहद: 1962 के युद्ध में देश के लिए दी कुर्बानी, चीन की सेना ने भी किया सम्मान, और भारत को लौटा दीं इनकी अस्थियां

सुबेदार जोगिंदर सिंह ने चीनी सेना को मुंहतोड़ जवाब दिया और चीनी सेना के दो हमलों को असफल कर दिया. इससे चीनी सैनिक सकते में थे कि आखिर कैसे उनकी 200 सैनिकों की टुकड़ी पर 23 भारतीय सैनिक भारी पड़ रहे हैं.

Subedar Joginder Singh (Photo: Wikipedia) Subedar Joginder Singh (Photo: Wikipedia)
हाइलाइट्स
  • पंजाब में जन्मे थे सूबेदार जोगिंदर सिंह

  • 1936 में जॉइन की सिख रेजिमेंट

  • मरणोपरांत मिला परमवीर चक्र

साल 1962 में हुआ भारत-चीन युद्ध आज भी लोगों को जेहन से नहीं उतरा है. और शायद ही पुरानी पीढ़ी के लोग इस युद्ध को भूल पाएं. हालांकि, बहुत से लोग इस युद्ध को भारत की हार के रूप में याद रखते हैं. जबकि इस युद्ध को उन शहीदों के लिए याद किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपने देश के लिए बिना किसी स्वार्थ अपने प्राण दे दिए. 

आज हम आपको बता रहे हैं भारत मां के एक ऐसे सपूत के बारे में, जिसकी कुर्बानी ने चीन की सेना के दिल को भी झकझोर दिया. यह कहानी है भारतीय सेना के सूबेदार जोगिंदर सिंह की, जिन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया. पंजाब में मोगा के पास एक गांव में जन्मे जोगिंदर सिंह ने 28 सितंबर 1936 को भारतीय सेना (तब ब्रिटिश इंडियन आर्मी) की सिख रेजिमेंट जॉइन की थी. 

1962 से पहले भी लड़े थे युद्ध

अपनी पोस्टिंग के बाद जोगिंदर सिंह ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के लिए बर्मा जैसे मोर्चों पर लड़ाई लड़ी. भारत के आज़ाद होने के बाद 1948 में कश्मीर के लिए हुए हमले में भई उन्होंने दुश्मन का मुकाबला किया. पर 1962 के युद्ध ने उन्हें अमर कर दिया. क्योंकि इस युद्ध में अपनी जान देने से पहले उन्होंने कई बार चीनी सेना को आगे बढ़ने से रोका.

अगस्त 1962 में अक्साई चिन और पूर्वी सीमा (नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी) पर कब्जा करने के लिए चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारत पर हमला किया. जिसके बाद चीनी सेना ने थगला रिज पर कब्जा किया. उस समय चीन के सामने भारतीय सेना की स्थिति बहुत कमजोर थी पर भारतीय सैनिक पीछे नहीं हटे.  

लेकिन चीनी सेना मजबूत स्थिति में होने के कारण लगातार आगे बढ़ रही थी. चीनी सेना ने तवांग पर अपना ध्यान लगाया और नमका चु से तवांग के लिए सबसे छोटा रास्ता बम-ला एक्सिस से हो कर जाता है. इसलिए उन्होंने बम-ला पर हमले की योजना बनाई. 

जब 200 चीनी सैनिकों पर भारी पड़े 23 भारतीय सपूत

चीन ने 200 सैनिकों की टुकड़ी हमले के लिए तैयार की. जबकि बम-ला पोस्ट की रक्षा के लिए भारत के सिर्फ 23 सैनिक थे. पर चीनी सेना को यह नहीं पता था कि इस छोटी सी पलटन का नेतृत्व एक शेर कर रहा है. और वह शेर थे सुबेदार जोगिंदर सिंह. जोगिंदर सिंह ने इस जगह की भौगोलिक स्थिति को अच्छे से समझा और रणनीति बनाकर बंकरों को ऐसे लगाया कि चीन की सेना के लिए आगे बढ़नी मुश्किल हो गया. 

इससे चीनी सेना सकते में आ गयी क्योंकि उन्हें ऐसे जबाव की उम्मीद नहीं थी. चीनी सेना ने और हथियारों के साथ हमला किया पर इस बार भी वे आगे नहीं बढ़ पाए. लेकिन इस समय तक भारतीय सेना भी अपने लगभग आधे सैनिक खो चुकी थी. जोगिंदर सिंह खुद पूरी तरह घायल हो गए थे, लेकिन पीछे नहीं हटे. 

आखिरी सांस तक लड़ी लड़ाई

चीन की सेना ने एक बार फिर हमला शुरू किया और इस बार भारतीय सेना के पास हथियार और बारूद खत्म होने लगा था. सूबेदार जोगिंदर सिंह ने पीछे हटने की बजाय अपने तीन सैनिकों को गोला-बारूद लाने भेजा. बाकी सभी सैनिक अपने सुबेदार के साथ की दृढ़ता और बहादुरी से मैदान में डटे रहे. 

पर चीनी सेना का हमला बढ़ने लगा तो जोगिंदर और उनके बाकी बचे हुए सैनिकों ने अपने बैयोनेट्स (कृपाण) को अपनी राइफल में लगाया और आखिरी बार चीनी सेना पर हमला बोल दिया. पूरे मैदान में ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ का बोल गूंजने लगा. इस हमले में जोगिंदर सिंह को गोली लगी पर वे लड़ते रहे. चीनी सेना ने उन्हें बंदी बना लिया और वहीं उन्होंने आखिरी सांस ली. 

मरणोपरांत मिला परमवीर चक्र

जोगिंदर सिंह की पलटन से सिर्फ 3 सैनिक जीवित बचे, जिन्हें जोगिंदर सिंह ने गोला-बारूद लाने भेजा था. जोगिंदर सिंह को उनके अदम्य साहस के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. यह स्वतंत्र भारत का सर्वोच्च युद्धकाल बहादुरी पुरस्कार है. दूसरी तरफ जब चीन की सेना को पता चला कि जोगिंदर सिंह कितनी बहादुरी से लड़े और उन्हें परमवीर चक्र मिला है तो चीनी सेना ने खुद आगे आकर उनकी अस्थियां भारतीय सेना को लौटा दीं. 

भारतीय सेना ने जोगिंदर सिंह की याद में आईबी रिज पर स्मारक भी बनाया है.1962 के युद्ध में भारत भले ही न जीत सका हो पर भारत के इस लाल ने दुश्मन को जरूर जीत लिया था. सुबेदार जोगिंदर सिंह पर आधारित एक पंजाबी फिल्म भी बनी है, जिसमें उनका किरदार अभिनेता गिप्पी गरेवाल ने निभाया है.