वो लोग बडे हिम्मतवाले होते हैं, जो खुद की राह बनाते हैं. कौन सोच सकता था कि गुजरात के कच्छ में जहां महिलाएं आमतौर पर घर की चारदीवारी पार नहीं कर पातीं, वहां एक गांव की ज्यादातर महिलाएं आत्मनिर्भर हो सकती हैं. लेकिन ऐसा हुआ क्योंकि गीता बेन ने इसके बारे में सोचा और मजबूती के साथ पहला कदम आगे बढाया.
अब आपको दिखाते हैं आत्मविश्वास से भरपूर आदिवासी लड़कियों की कहानी. मध्य प्रदेश में खंडवा-बैतूल मार्ग पर बसे आदिवासी गांवों की कुछ लड़कियां वो काम करके आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिसे करने के लिए उन्हें ताने दिए गए. लेकिन वो अपने काम में पूरी लगन से डटी रहीं. आज इन लड़कियों ने साबित कर दिखाया है कि वो गांव में रहकर ही परिवार की देखभाल कर सकती हैं. उनके परिवार को बाहर जाकर मजदूरी करने की जरूरत नहीं है. माता-पिता का सीना चौड़ा करने वाली इन बेटियों ने गांवों के लोगों का भरोसा भी जीता है. देखें देश की बात सुनाती हूं.
कोरोना काल के दौरान बिजनेस में लाखों रुपए का नुकसान हुआ. घर क्या, शहर तक छोड़ना पड़ा. भूखा रहकर फुटपाथ पर सोना पड़ा, जिंदगी से तंग आकर खुदकुशी करने की भी सोची. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. कई सारे ट्विस्ट वाली ये कहानी है मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले एक नौजवान की, जो घर से भागकर इंदौर पहुंच गया. शिवम सोनी नाम का ये नौजवान इंदौर में अब अपनी दुकान चलाता है, जहां खाने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है.
नशे की लत हो या गलत काम करने की आदत या फिर कोई दूसरी बुराई, आसानी से नहीं छूटती. क्योंकि बुराई के दलदल से निकलने की हिम्मत सब नहीं जुटा पाते और कई बार इससे निकलना, सबकी क़िस्मत में भी नहीं होता. लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी ज़िले के एक छोटे से गाँव की महिलाएं एक ऐसे दलदल से बाहर निकल गई हैं, जिससे निकलने का रास्ता उन्हें कई दशकों तक नहीं मिला.
गुजरात के वडोदरा में एक ऐसा शख्स है जो इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर एक चाय वाला बन गया. महाराष्ट्र् के रहने वाले गणेश ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो की, लेकिन चंद हजार रुपयों की नौकरी करने के बजाय उन्होंने अपना काम करने की राह चुनी और अपनी कर्मभूमि के लिए गुजरात को चुना.
यूपी के चंदौली जिले में तैनात डीएसपी अनिरुद्ध सिंह की पहचान रीयल लाइफ में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर होती है. लेकिन वो रील लाइफ में भी नजर आते हैं. हीरो लुक वाले अनिरुद्ध सिंह फिल्मों में भी पुलिस ऑफिसर की भूमिका निभा चुके हैं. और तो और पुलिस की ड्यूटी करने के साथ ही वो बेसहारा लड़कियों की शादी करवाने जैसे सोशल वर्क भी करते हैं. देखें देश की बात सुनाती हूं.
इंसान अगर फिट रहे तो बढ़ती उम्र उसके लिए सिर्फ एक नंबर नजर आती है. मुंबई में रहने वाली 66 साल की पुष्पा भट्ट के लिए भी उम्र कोई मायने नहीं रखती. वो इस उम्र में भी मैराथन दौड़ती हैं. कई मैराथन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकीं पुष्पा का अगला टारगेट जैसलमेर में होने वाली बॉर्डर 100 किमी मैराथन में हिस्सा लेना है, जिसकी तैयारी वो जोर शोर से कर रही हैं.
आज गुड न्यूज़ टुडे आपको एक ऐसे शख्स से मिलवाने जा रहा है जिसके काम को आप बहुत अच्छे से जानते हैं. ये शख्स मैथमेटिक्स का जादूगर हैं. और ये गारंटी है कि अगर आप स्कूल गए हैं तो कभी ना कभी इस जादूगर का जादू आपकी जिंदगी में भी जरूर चला होगा. हम पहुंच गए हैं आर डी शर्मा सर के पास. देश से लेकर विदेश तक आर डी शर्मा सर की मैथ की किताब मशहूर हैं. सर ने अब तक गणित में 28 किताबें लिखी है. इनमे क्लास 6th से लेकर 12th तक सीबीएसई बोर्ड की मैथ की किताबे हैं.
पुलिसवालों की छवि को आम तौर पर सख्त समझा जाता है. पब्लिक के बीच ये माना जाता है कि पुलिसवाले ज्यादा संवेदनशील नहीं होते. लेकिन आज मैं आपको मिलवाती हूं कुछ ऐसे पुलिसवालों से, जो बेसहारा जानवरों के दर्द को महसूस करते हैं. अपनी ड्यूटी के साथ ही बेजुबानों के लिए एक आसरा भी चलाते हैं. लखनऊ में पुलिस की इस टीम ने जानवरों के लिए एक शेल्टर होम बनाया है, जहां तमाम तरह के घायल बेसहारा जानवरों की देखभाल की जाती है.
शिमला के सरबजीत सिंह, जो कि बॉबी वेला नाम से लोकप्रिय हैं. बरसों से समाजसेवा कर रहे सरबजीत सिंह शिमला के IGMC Hospital में मुफ्त लंगर की सुविधा चला रहे हैं. इसके साथ ही वो मरीजों के तीमारदारों को मुफ्त कंबल और बेडिंग की सुविधा भी देते हैं. सरबजीत लंबे समय से फ्यूनरल वैन चलाकर भी लोगों की सेवा करने में जुटे हैं. देखें ये रिपोर्ट.
एक युवा एंटरप्रेन्योर जो सिर्फ बारहवीं पास है, लेकिन उसके बिजनेस का टर्नओवर पांच करोड़ के आसपास है. हुसैन सैफी नाम के इस लड़के ने बारह साल की उम्र में सेकंड हैंड कंप्यूटर पर हाथ चलाना शुरू किया था. पंद्रह साल की उम्र तक खेल खेल में गेम्स और म्यूजिक से जुड़ी कुछ वेबसाइट बना डालीं.